शोध ऐसी हो, जो राज्य के नीति निर्माताओं को दिशा दे सके

विभावि के राजनीतिशास्त्र विभाग में व्याख्यान, प्रो अशोक कुमार शर्मा ने कहा

हजारीबाग. विभावि राजनीतिशास्त्र विभाग में शुक्रवार को व्याख्यान का आयोजन किया गया. मुख्य वक्ता राजस्थान के कोटा ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति एवं राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक प्रो अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि शोध ऐसी हो, जिससे राज्य के नीति निर्धारण को मदद मिले. प्रो शर्मा ने बताया कि शोध की वर्णनात्मक शैली के दिन ढल गये हैं. वर्तमान में व्यवहारजनित शोध का प्रचलन बढ़ा है. जब शोध करना ही है, तो इसे अच्छे से करना चाहिए. अर्थात शोध ऐसी हो जिससे शोध करने वाले को आनंद की अनुभूति हो. साथ में समाज को भी लाभ पहुंचे. उन्होंने कहा कि शिक्षक सभी शोधार्थियों की खुले मन से मदद करें, सुझाव दें. यह नहीं देखे कि कौन से स्कॉलर किस शिक्षक के अंतर्गत पंजीकृत हैं. यदि हमारे विषय में, हमारे विश्वविद्यालय में पंजीकृत हैं, तो वह हम सब के शोधार्थी हैं. उनका मार्गदर्शन करना हम सब शिक्षकों का दायित्व बनता है. प्रो शर्मा ने कहा कि ऐसा शोध नहीं कीजिए, जो बाद में किसी को कोई लाभ नहीं पहुंचा सके. जो केवल किसी पुस्तकालय की एक अलमीरा में बंद रहे. उन्होंने कहा कि सार्थक शोध वह है, जो राज्य के नीति निर्माताओं को दिशा दे सके. बहुत ऐसे विषय होते हैं जिस पर सरकार को सही जानकारी नहीं होती है. यदि हम शोध के माध्यम से सरकार को उन विषयों की विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध करा सके, तो सरकार को उन क्षेत्रों में नीति निर्धारण करने में मदद मिलेगी. इससे न केवल शोधार्थी को संतोष की प्राप्ति होगी बल्कि इससे शोधार्थी, शिक्षक, विभाग एवं विश्वविद्यालय का नाम भी रोशन होगा.

शोध में डेटा का अत्यधिक महत्व : रेणु बोस

इस अवसर पर समाज विज्ञान संकाय के अध्यक्ष एवं गृह विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ रेणु बोस ने बताया कि शोध में डेटा का अत्यधिक महत्व है. उन्होंने डेटा संकलन के अलग-अलग विधि की जानकारी दी. यह भी बताया कि अपने शोध प्रबंध (थिसिस) में तथा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में आकर्षक चित्र बनाकर डेटा को दर्शाया जाना चाहिए. कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ सुकल्याण मोइत्रा ने की. इस अवसर पर पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ बालेश्वर प्रसाद सिंह, विभागीय प्राध्यापक डॉ अजय बहादुर सिंह, बरकट्ठा कॉलेज के प्राचार्य एवं राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ बलदेव राम, मानवविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ विनोद रंजन समेत विभाग के शोधार्थी तथा पीएचडी कोर्स वर्क पाठ्यक्रम में नामांकित विद्यार्थी उपस्थित थे.

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Published by: Sunil prasad

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