सत्र 2026-27 से स्नातकोत्तर में लागू होगा नया पाठ्यक्रम

विभावि में तीन बाह्य विशेषज्ञ के साथ उच्च स्तरीय बैठक

हजारीबाग. विनोबा भावे विश्वविद्यालय में नयी शिक्षा नीति 2020 के तहत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और क्रेडिट रूपरेखा निर्धारित करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक मंगलवार को हुई. इसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने की. बैठक में समिति के संयोजक और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभावि संयोजक डॉ इंद्रजीत कुमार ने कहा कि 12 जून 2024 को जारी यूजीसी के दिशा-निर्देशों पर विस्तार से चर्चा की गयी. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर नयी शिक्षा नीति 2020 पूरी तरह लागू कर दी गयी है. अब 2026-27 सत्र से एक-वर्षीय स्नातकोत्तर और 2026-28 सत्र से दो-वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी चल रही है. डॉ इंद्रजीत कुमार ने बताया कि यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू के प्रो पंकज श्रीवास्तव, इग्नू के स्कूल ऑफ साइंस के प्रो सुदीप झा और मेघालय के नेहूं के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो रमेश शर्मा बतौर बाह्य विशेषज्ञ बैठक में शामिल हुए. उन्होंने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से विश्वविद्यालय द्वारा तैयार प्रारूप को प्रस्तुत किया. नये पाठ्यक्रम के तहत प्रत्येक सेमेस्टर में पांच पत्रों की पढ़ाई होगी. प्रत्येक पत्र चार क्रेडिट का होगा. इस प्रकार हर सेमेस्टर का कुल क्रेडिट 20 निर्धारित किया गया है. इसमें कोर्स वर्क, प्रोजेक्ट और शोध प्रबंध पर विशेष जोर दिया गया है. बैठक में भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ सरोज कुमार सिंह और गणित विभागाध्यक्ष डॉ गोविंद झा ने कई सुझाव दिये. पांच-वर्षीय इंटीग्रेटेड स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम लागू करने का प्रस्ताव भी रखा गया. इस दौरान बताया गया कि एफिलिएटिंग यूनिवर्सिटी में इस व्यवस्था को लागू करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि विभावि में स्नातक की पढ़ाई महाविद्यालयों में होती है, जबकि विश्वविद्यालय विभागों में मुख्य रूप से स्नातकोत्तर की पढ़ाई संचालित होती है. डॉ इंद्रजीत कुमार ने कहा कि क्रेडिट रूपरेखा तय होने के बाद सभी विभागों में पाठ्यक्रम समितियों का गठन किया जायेगा. विभागीय समितियां बाह्य विशेषज्ञों से परामर्श लेकर नया पाठ्यक्रम तैयार करेंगी. इसके बाद प्रस्ताव को विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद की बैठक में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जायेगा. बैठक में विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक उपस्थित थे. सहायक दीपू कुमार ने तकनीकी सहयोग दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलानुशासक डॉ सादिक रज्जाक ने किया.

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Author: SUNIL PRASAD

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