हजारीबाग में प्रकृति पर्व सरहुल की धूम, सखुआ फूलों की पूजा के साथ उमड़ा जनसैलाब

सरहुल पर्व हजारीबाग जिले में हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया

संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देता है सरहुल

हजारीबाग. सरहुल पर्व हजारीबाग जिले में हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया, इस अवसर पर सखुआ (साल) के फूलों की पूजा-अर्चना की गयी, संत स्टीफन मैदान में मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए, शनिवार की सुबह पाहन ने मिट्टी के बर्तन में रखे जल के स्तर को देखकर मानसून की संभावनाओं का पारंपरिक आकलन किया, जिसे लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता रही,

भव्य शोभायात्रा इस पर्व का मुख्य आकर्षण रही

आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा, सारण झंडा, बैनर, हथियार और वाद्य यंत्रों के साथ अनुशासित ढंग से शामिल हुए, युवक-युवतियां सफेद, हरे और लाल रंग के पाढ़ पोशाक में नाचते-गाते आगे बढ़े, शोभायात्रा संत स्टीफन स्कूल मैदान से शुरू होकर नया बस स्टैंड, सरदार चौक, पंच मंदिर चौक, झंडा चौक, इंद्रपुरी चौक, जिला परिषद चौक और बिरसा चौक होते हुए सरना स्थल तक पहुंची, विभिन्न सरना समितियों द्वारा प्रस्तुत झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया और शहरवासियों ने जगह-जगह स्वागत किया,

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल झंडा चौक पर शोभायात्रा में शामिल हुए और श्रद्धालुओं के साथ थिरके, उन्होंने कहा कि सरहुल पर्व आदिवासी सभ्यता, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देता है, यह पर्व समाज में उत्साह, उमंग और जीवन जीने की कला का संचार करता है, उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच पेयजल और जूस का वितरण भी किया, इस दौरान मेयर अरविंद कुमार राणा, डिप्टी मेयर अविनाश कुमार यादव सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे,

प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है सरहुल

पुलिस लाइन में भी प्रशासनिक पदाधिकारियों ने सरहुल मनाया, उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के साथ पारंपरिक वेशभूषा धारण कर कलाकारों के साथ नृत्य किया, उन्होंने कहा कि सरहुल प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का अवसर है, उन्होंने लोगों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के प्रति सजग रहने की अपील की,

श्रद्धालुओं की भीड़ और शोभायात्रा को देखते हुए यातायात व्यवस्था में विशेष बदलाव किए गए, सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक भारी वाहनों और चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक रही, कई मार्गों पर नो एंट्री की घोषणा की गयी और सभी चौक-चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती की गयी,

संत स्टीफन स्कूल मैदान में सरहुल पूजा को लेकर सभा भी आयोजित हुई, मुख्य अतिथि कांग्रेस नेता मुन्ना सिंह ने कहा कि सरहुल केवल त्योहार नहीं, बल्कि साल वृक्ष और धरती माता के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, यह पर्व हमें प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर रहने की सीख देता है, नई फसल और हरियाली की कामना यह उत्सव हम सभी के लिए प्रेरणादायक है, कार्यक्रम को सफल बनाने में आदिवासी सरना समिति के अध्यक्ष महेंद्र बैक, सचिव सुनील लकड़ा, जिला पाहन बंधन टोप्पो, पवन तिग्गा, बंधन एक्का, महेंद्र कुजूर सहित कई लोग शामिल रहे,

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Published by: Vikash nath

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