वीबीजी रामजी बिल के विरोध में वाम दलों का मार्च व प्रदर्शन

महात्मा गांधी के नाम पर चल रही योजना को समाप्त करना ओछी राजनीति का परिचायक : सीटू

हजारीबाग. वीबीजी रामजी बिल (विकसित भारत गारंटी फोर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) के राष्ट्रव्यापी विरोध के आह्वान पर हजारीबाग में वाम दलों ने मार्च निकाल कर मोदी सरकार का विरोध किया. नयी बिल की प्रति जलायी और धरना स्थल पर सभा की. इस दौरान सीपीएम जिला सचिव गणेश कुमार सीटू ने कहा कि मनरेगा दुनिया की सबसे बड़ी सोशल सिक्योरिटी स्कीम है. यह कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत के गांव में लागू है. अब तक इससे लगभग 25 करोड़ मजदूर जुड़े हुए हैं. 14.33 करोड़ तो ऐसे हैं, जो लगातार एक्टिव हैं. मनरेगा की पहुंच 2.69 लाख ग्राम पंचायत, 70,000 से अधिक प्रखंड और 700 से अधिक जिलों में है. नया विधेयक केंद्र सरकार का धोखाधड़ी कदम है. नये कानून में केंद्र सरकार ने अपना अंशदान 90 से घटाकर 60 प्रतिशत, जबकि राज्य का अंशदान 10 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार घटेगा. राज्यों में वित्त संकट का सामना करना पड़ रहा है. इससे राज्यों के साथ भेदभाव बढ़ेगा. ग्राम पंचायत के योजना चयन करने, उसके संचालन और पर्यवेक्षण के अधिकार का हनन किया जा रहा है. महात्मा गांधी के नाम पर चल रही योजना को समाप्त करना ओछी राजनीति का परिचायक है. मनरेगा का नाम बदलकर वीबी रामजी करने से काफी पैसा खर्च होगा. अध्यक्षता सीपीआइ के महेंद्र राम ने की. संचालन सीपीएम के तपेश्वर राम भुइयां ने किया. प्रदर्शन में सुरेश कुमार दास, ईश्वर महतो, प्रवीण मेहता, अब्दुल मजीद, रामदास गोप, हरबोध गोप, संजय गोप, किरण देवी, अंजू देवी, कईली देवी, मंटू ठाकुर, निर्मला साहू सहित कई लोग शामिल थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SUNIL PRASAD

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >