टाटीझरिया. 18 मई की रात हटकोना गांव की दो बच्चियों नेहा कुमारी (13 वर्ष, पिता नरेश सिंह भोक्ता) और परी कुमारी (16 वर्ष, पिता हुकुम भोक्ता) को जहरीले सांप ने काट लिया. परिजन आनन-फानन में बच्चियों को इलाज के लिए कटकमसांडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और न ही तत्काल इलाज की समुचित व्यवस्था हो पायी. परिजनों के अनुसार बच्चियां दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन अस्पताल में मौजूद कर्मियों ने भी गंभीरता नहीं दिखायी. परिजनों का आरोप है कि करीब एक घंटे बाद अस्पताल के कुछ कर्मी कटकमसांडी थाना बल के साथ अस्पताल पहुंचे, लेकिन इलाज और स्थिति संभालने के बजाय उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया. अस्पताल में इलाज नहीं होने के बाद परिजनों ने दोनों घायल बच्चियों को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया, जहां परी कुमारी की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि नेहा कुमारी की स्थिति में सुधार देखते हुए उसे घर भेज दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि कटकमसांडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रात के समय एक भी डॉक्टर नहीं रहते हैं. डॉक्टरों की अनुपस्थिति और आपातकालीन सेवाओं की लापरवाही से लोग परेशान हैं. ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अस्पताल कर्मी पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. 18 मई की रात हटकोना गांव की दो बच्चियों नेहा कुमारी (13 वर्ष, पिता नरेश सिंह भोक्ता) और परी कुमारी (16 वर्ष, पिता हुकुम भोक्ता) को जहरीले सांप ने काट लिया. परिजन आनन-फानन में बच्चियों को इलाज के लिए कटकमसांडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और न ही तत्काल इलाज की समुचित व्यवस्था हो पायी. परिजनों के अनुसार बच्चियां दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन अस्पताल में मौजूद कर्मियों ने भी गंभीरता नहीं दिखायी. परिजनों का आरोप है कि करीब एक घंटे बाद अस्पताल के कुछ कर्मी कटकमसांडी थाना बल के साथ अस्पताल पहुंचे, लेकिन इलाज और स्थिति संभालने के बजाय उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया. अस्पताल में इलाज नहीं होने के बाद परिजनों ने दोनों घायल बच्चियों को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया, जहां परी कुमारी की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि नेहा कुमारी की स्थिति में सुधार देखते हुए उसे घर भेज दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि कटकमसांडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रात के समय एक भी डॉक्टर नहीं रहते हैं. डॉक्टरों की अनुपस्थिति और आपातकालीन सेवाओं की लापरवाही से लोग परेशान हैं. ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अस्पताल कर्मी पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.
सीएचसी में नहीं हुआ सर्पदंश से घायल बच्चियों का इलाज
रात में एक भी डॉक्टर नहीं थे, ग्रामीण आक्रोशित
