बड़कागांव :डाडीकला में पुलिस फायरिंग में मेहताब अंसारी की मौत के बाद उसके गांव चेपाखुर्द गांव में मातम पसरा हुआ है. घटना के बाद चेपाखुर्द के ग्रामीण भयभीत हैं. रविवार को इस गांव के करीब 50 घरों में चूल्हे नहीं जले. मेहताब की पत्नी शकीला खातून रविवार को रह रहकर बेहोश हो रही थी. उसका एक ही बात कहना था कि अब मेरा और बच्चे का क्या होगा.
वृद्ध पिता मोजिब अंसारी के अनुसार उनके तीन पुत्र थे. आसीन अंसारी, आफताब अंसारी एवं मेहताब अंसारी. तीनों अलग-अलग रह रहे थे. मेहताब की बड़ी बेटी सोहानी आठ वर्ष की है. यह बरटोला के नव प्राथमिक विद्यालय के चौथी कक्षा में पढ़ती है. पुत्र सहबेज अंसारी छह वर्ष का है. वह पहली कक्षा में पढ़ता है. छोटा पुत्र सरफराज अंसारी चार साल का है. वह आंगनबाड़ी में पढ़ता है. पिता मोजिब अंसारी इस बात को लेकर फफक रहे थे कि बच्चों का परवरिश कैसे होगा.
दिल्ली से ईद में आया था
मृतक के चचेरे भाई मो इम्तियाज ने कहा कि बताया कि मो मेहताब दिल्ली में टेलर का काम करता था. वह ईद में घर आया था. घरवालों ने दिल्ली नहीं जाने दिया. तब से यह बड़कागांव में मजदूरी का काम करता था. 30 सितंबर को 11 बजे रात तक उसने बड़कागांव के दुर्गा मंदिर में काम किया. सुबह में वह पावा नदी में शौच करने गया था. इस दौरान उसे पुलिस की गोली लगी. उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गयी. घर की माली हालत भी ठीक नहीं है. मेहताब के परिजन दिन भर पोस्टमार्टम के बाद शव आने का इंतजार कर रहे थे. शाम में शव पहुंचते ही पूरे गांव में मातम पसर गया. गांववाले काफी आक्रोशित थे. बाद में शव को स्थानीय कब्रिस्तान में दफनाया गया.
