हजारीबाग : हजारीबाग बार एसोसिएशन का गठन वर्ष 1878 ई में हुआ था. यह बिहार-झारखंड के सबसे पुराने एसोसिएशन में से एक है. रवींद्रनाथ टैगोर ने भी अपने उपन्यास नौका डुबी में हजारीबाग बार एसोसिएशन का उल्लेख किया है.
भारतीय दंड संहिता के पुराने संस्करण में भी हजारीबाग जिले की न्याय व्यवस्था का जिक्र है. बार एसोसिएशन का चुनाव भी काफी अनुशासित ढंग से होता आया है. हजारीबाग बार एसोसिएशन हाल के दिनों में सबसे अधिक चर्चा में अधिवक्ता कल्याण कोष को लेकर आया था. एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ताओं के कल्याणार्थ कई उल्लेखनीय कार्य किये गये.
वर्ष 2012 में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शत्रुंजय प्रसाद सिंह, महासचिव राजकुमार राजू के कार्यकाल में अधिवक्ता कल्याण कोष से अधिवक्ताओं को काफी फायदा मिला. राज्य भर में सबसे कम उम्र के युवा अधिवक्ता के रूप में महासचिव का चुनाव राजकुमार राजू ने जीत कर नया कीर्तिमान स्थापित किया था. अधिवक्ताओं के निधन पर तत्काल एक लाख का भुगतान देने का कार्य यहां शुरू हुआ. त्योहार भत्ता के रूप में प्रति अधिवक्ता को पांच हजार रुपये वार्षिक, एक डायरी भी उपभोक्ताओं को मिलने लगे. हजारीबाग बार भवन का अपना कैंटीन संचालित हुआ. अधूरे भवन का निर्माण कार्य अधिवक्ताओं ने अपने राशि से करवाया.
हजारीबाग जिला विभाजन पर भी अध्यक्ष विक्रम सेन, महासचिव राजकुमार राजू के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने किया. आंदोलन के परिणाम स्वरूप निगरानी न्यायालय, हजारीबाग में जनवरी 2016 से शुरू हुआ. इनकम टैक्स की अपील की कार्रवाई भी शुरू हुई.
अन्य विशेष न्यायालयों के लिए सरकार ने बार एसोसिएशन की मांग को माना है. मुख्य न्यायाधीश के पास अनुमति के लिए भेज दिया है. बार एसोसिएशन की नाली, पाथवे निर्माण का शिलान्यास हो गया है. होली के अवकाश में यह कार्य होंगे. विधायक मनीष जायसवाल ने बार भवन में सोलर इनर्जी सिस्टम की सुविधा उपलब्ध कराने की सहमति दी है. बार भवन की रंगाई पोताई व स्वच्छता पर ध्यान दिया गया. अधिवक्ताओं के संघ की ओर से हजारीबाग बार एसोसिएशन को अलग पहचान दिलाया है.
