बरही : बरही अनुमंडल का गठन 21 साल पहले हुआ था. इसका उद्घाटन अविभाजित बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 1994 में किया था़, लेकिन विडंबना यह है कि दो दशक के बाद भी बरही अनुमंडल में प्रशासनिक व न्यायिक विभाग नहीं खुल़े व्यवहार न्यायालय का गठन आज तक नहीं हो पाया.
सिविल व क्रिमिनल केस के मामले में बरही अनुमंडल के लोगों को आज भी हजारीबाग व्यवहार न्यायालय जाना पड़ता है़ चौपारण, बरकागांव, पद्मा व बरही प्रखंड के सुदूर गांव के लोगों को लंबी दूरी तय कर हजारीबाग जाना पड़ रहा है़ यहां के लोग शुरू से ही बरही अनुमंडल न्यायालय में व्यवहार न्यायालय स्थापित करने की मांग करते रहे हैं.
अधिवक्ता संघ आंदोलन के मूड में: व्यवहार न्यायालय के स्थापित नहीं होने से बरही अनुमंडलीय अधिवक्ता संघ क्षुब्ध है़संघ के अध्यक्ष नागेश्वर केशरी, उपाध्यक्ष उमेश गुप्ता, सचिव राजकुमार प्रसाद व आरके नटवर ने बताया कि व्यवहार न्यायलय की मांग को लेकर संघ ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, झारखंड बार एसोशिएसन तत्कालीन विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा, वर्तमान वित्त मंत्री जयंत सिन्हा को समय-समय पर ज्ञापन दिया गया है़ प्रतिनिधिमंडल ने भी रांची हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मिल कर उन्हें ज्ञापन सौंपा. व्यवहार न्यालय की मांग को लेकर होली के बाद आंदोलन का निर्णय लिया गया है. मौके पर सुशील कुमार सिंह, राजीव गुप्ता, सौरभ सिन्हा, रामत सिंह, झारखंडी साहा, राधेलाल चौधरी, जगदीश नारायण, भारत भूषण, रवि शंकर, राजेन्द्र राणा, आशीष ओझा, केपी चौधरी, सुखदेव शर्मा सहित कई अधिवक्ता मौजूद थ़े
चार वषों से बंद है जेल का निर्माण कार्य: बरही अनुमंडल व्यवहार न्यालय खोले जाने से पहले बरही अनुमंडलीय जेल का निर्माण होना था़ लोगों का कहना है कि जब तक जेल का निर्माण पूर्ण नहीं होगा, तब तक व्यवहार न्यायालय का कामकाज संभव नहीं है़ सात आठ वर्षों के बाद भी अनुमंडलीय जेल का निर्माण नहीं हो पाया है़ निर्माण का काम वर्ष 2008 में शुरू हुआ था़ तीन चार वर्षों से जेल का निर्माण कार्य ठप है.
व्यवहार न्यायालय के लिए लिखा गया है : एसडीओ
बरही एसडीओ मो शब्बीर अहमद ने बताया कि इस समय बरही न्यायालय में सिर्फ धारा 107 व धारा 144-145 के मुकदमे की सुनवाई हो रही है़ व्यवहार न्यायालय आ जाने से सिविल व क्रिमिनल के मामलों की भी सुनवाई होगी. इससे लोगों को फायदा मिलेगा. बरही में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए उपायुक्त के माध्यम से सरकार को लिखा गया है़.
