स्वरूप बदलते ही ज्ञान बदल जाता हैपिच्छी परिवर्तन व चातुर्मास निष्पादन कार्यक्रम का समापनसंत का जीवन पिच्छी परिवर्तन के साथ ही आत्म परिवर्तन की आभा से अलौकित होता है : मुनिश्री प्रतिनिधि, झुमरीतिलैया श्री दिगंबर जैन समाज के नेतृत्व में एलाचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज का भव्य पिच्छी परिवर्तन व चातुर्मास निष्पादन कार्यक्रम धूमधाम से संपन्न हुआ. बुधवार सुबह छह बजे से भगवान का अभिषेक, शांति धारा व संगीतमय पूजन हुआ. इसके बाद पिच्छी परिवर्तन कार्यक्रम शुरू हुआ. इसका मंगलाचरण छोटे-छोटे बच्चों ने नृत्य से किया. चातुर्मास संयोजक राज छाबड़ा ने कहा कि यह कार्यक्रम सबके सहयोग से संपन्न हुआ है. मौके पर जैन महिला संगठन की महिलाओं ने नृत्य प्रस्तुत किया. समाज के कई युवाओं ने पाद पच्छालन किया. मुनि श्री की पुरानी पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य विमल बड़जात्या व मूल्याकंन तत्व सागर जी महाराज का पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य नंदु बड़जात्या के परिजनों को मिला. कार्यक्रम के दौरान मुनि श्री ने कहा कि दिन बदलते ही रात हो जाता है, हवा बदलते ही मौसम बदल जाता है,सूर्य उगते ही सुंदर आकाश बदल जाता है, तीर्थ जाते ही मन बदल जाता है, घर बदलते ही स्वभाव बदल जाता है,सूर्य को देखते ही कमल खिल जाता है, वस्त्र बदलते ही रूप बदल जाता है, रूप बदलते ही स्वरूप बदल जाता है व स्वरूप बदलते ही ज्ञान बदल जाता है़ इसलिए संत का जीवन पिच्छी परिवर्तन के साथ ही आत्म परिवर्तन की आभा से अलौकित होता है. लक्की ड्राॅ में शंभु अव्वल कार्यक्रम के दौरान समाज द्वारा लक्की ड्राॅ का आयोजन किया गया़ इसमें प्रथम शंभु सरावगी गिरिडीह, द्वितीय दिलीप छाबड़ा व तृतीय शंभु सरावगी रहे. चातुर्मास में स्थापित मंगल कलश को कमल गंगवाल व अशोक पटौदी के घर पहुंचाया गया. संध्या पहर शांति नाथ भगवान की प्रतिमा के पास भव्य आरती, भजन व भक्ति नृत्य कार्यक्रम हुआ. स्थानीय पंडित अभिषेक जैन ने चातुर्मास की उपलब्ध्यिों पर प्रकाश डाला. मौके पर समाज के उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सेठी, सहायक मंत्री सुरेश सेठी, सरोज पापडीवाल, ललिता सेठी, महिला संगठन की नीलम सेठी, आशा गंगवाल, युवक समिति के अध्यक्ष अभिषेक गंगवाल, मंत्री विकास सेठी, विमल बडजात्या, मनीष सेठी, प्रेम झांझरी, कमल सेठी, राज छाबड़ा आदि मौजूद थे. बता दें कि जीव हिंसा से बचने के लिए उक्त कार्यक्रम होता है. जैन साधु बरसात में चार माह एक ही शहर में रहते हैं. क्योंकि इन्हें पूरे भारत में पैदल विहार करना है और बरसात में जीव हिंसा से बचने के लिए एक ही स्थान पर चातुर्मास करते हैं. यह कार्यक्रम 22 जुलाई को झुमरीतिलैया में शुरू हुआ था़
स्वरूप बदलते ही ज्ञान बदल जाता है
स्वरूप बदलते ही ज्ञान बदल जाता हैपिच्छी परिवर्तन व चातुर्मास निष्पादन कार्यक्रम का समापनसंत का जीवन पिच्छी परिवर्तन के साथ ही आत्म परिवर्तन की आभा से अलौकित होता है : मुनिश्री प्रतिनिधि, झुमरीतिलैया श्री दिगंबर जैन समाज के नेतृत्व में एलाचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज का भव्य पिच्छी परिवर्तन व चातुर्मास निष्पादन कार्यक्रम धूमधाम […]
