प्लास्टिक थैली से बन सकता है डीजल: निदेशक

प्लास्टिक थैली से बन सकता है डीजल: निदेशक चौपारण. सड़कों पर फेंके जानेवाली प्लास्टिक की थैली बहुत जल्द काम की हो जायेगी़ इन प्लास्टिक की थैलियों को डीजल, प्राकृतिक गैस, गैसोलीन, वैक्स और ल्यूब्रीकेट ऑयल जैसी उपयोगी पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जा सकता है़ इसके लिए जीआरओ (ग्रीन टेक रिसर्च एंड डेवलपमेंट व आर्गेनाइजेशन) संस्था […]

प्लास्टिक थैली से बन सकता है डीजल: निदेशक चौपारण. सड़कों पर फेंके जानेवाली प्लास्टिक की थैली बहुत जल्द काम की हो जायेगी़ इन प्लास्टिक की थैलियों को डीजल, प्राकृतिक गैस, गैसोलीन, वैक्स और ल्यूब्रीकेट ऑयल जैसी उपयोगी पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जा सकता है़ इसके लिए जीआरओ (ग्रीन टेक रिसर्च एंड डेवलपमेंट व आर्गेनाइजेशन) संस्था काम कर रहा है़ इसके लिए प्लास्टिक थैला को ऑक्सीजन मुक्त चैंबर में रख कर गर्म किया जाता है़ कच्चे पेट्रोलियम से तेल के शोधन 50 से 55 प्रतिशत इंधन मिलता है़ अधिकांश प्लास्टिक पेट्रो केमिकल से बने होते है. इसलिए शोध के जरिये 80 प्रतिशत इंधन दोबारा पाया जा सकता है़ उक्त बातें ग्रीन इनर्जी फाउंडेशन संस्था के संस्थापक सुनील कुमार सिंह ने बुधवार को संस्था कर्मियों के साथ बैठक में कहीं. शोध के जरिये अब तक प्लास्टिक से प्राप्त 30 प्रतिशत इंधन को मौजूदा सल्फर की कम मात्रा वाले डीजल में मिलाने में कामयाब हुए है़ उन्होंने ने कहा कि डीजल का यह मिश्रण मौजूदा डीजल से कई मायनों में बेहतर है़ इस प्रयोग के बाद समुद्र व नदियों में जमे प्लासिटक के कचड़ों, वन्य जीव जंतु, मछलियां, चिड़ियां जैसे प्लास्टिक से समाज पर बढ़ रहे दुष्प्रभाव से आमलोगों को निजात मिलेगी़ बैठक में झारखंड राज्य के कई शोधक विशेषज्ञ उपस्थित थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >