राज्यपाल के हाथों 347 डिग्री धारकों को उपाधि

विनोबा भावे विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह

हजारीबाग. विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में 10वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को विवेकानंद सभागार में हुआ. मुख्य अतिथि राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल आजीविका अर्जित करना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक का निर्माण करना है. हमारा देश ऐसे युवाओं की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है, जो चुनौतियों से घबराते नहीं, बल्कि उन्हें अवसर में बदलते हैं. जीवन में सफलता के पथ पर आगे बढ़ते हुए ईमानदारी, परिश्रम और नैतिकता को अपना मार्गदर्शक बनाइये और विकसित भारत ए-2047 एवं आत्मनिर्भर एवं सशक्त भारत के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान सुनिश्चित कीजिये. याद रखिये सच्ची सफलता वही है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक आशा और विश्वास पहुंचाये. उन्होंने कहा कि आप सभी विद्यार्थियों से यह अपेक्षा करता हूं कि आप शिक्षा के महत्व को केवल अपने तक सीमित न रखें. समाज के प्रति भी आपका एक बड़ा दायित्व बनता है. यदि प्रत्येक शिक्षित युवा कम से कम एक बच्चे की पढ़ाई की जिम्मेदारी ले ले, तो समाज से अशिक्षा और अंधकार स्वतः दूर हो सकता है. शिक्षा का दीपक जब एक से दूसरे तक पहुंचता है, तभी राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है. यह आपका नैतिक और सामाजिक कर्तव्य है, जिसे निभाकर आप सच्चे अर्थों में राष्ट्र-निर्माण में सहभागी बन सकते हैं.

प्लेसमेंट सेंटर को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है. ये विचार, चरित्र और चेतना के केंद्र होते हैं. मेरी अपेक्षा है कि विश्वविद्यालय शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध एवं सामाजिक सरोकारों की दिशा में अपने प्रयासों को और सुदृढ़ करेगा. मैं चाहता हूं कि हमारे राज्य के विश्वविद्यालयों की गणना देश के उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों में हो और यहां ज्ञान हासिल करने के लिए अन्य राज्य के विद्यार्थी भी लालसा रखें. छात्रहित में विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट सेंटर को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है. साथ ही, प्लेसमेंट सेंटर के पास विद्यार्थियों का समग्र एवं अद्यतन डाटा उपलब्ध होना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को समावेशी, मूल्यपरक और समाजोपयोगी बनाने की दिशा में सतत प्रयास किये जा रहे है. इस नीति के माध्यम से नयी पीढ़ी को अवसरों के साथ-साथ जिम्मेदारियों का भी बोध कराया जा रहा है, ताकि वे एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संवेदनशील भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें. उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप जीवन में कभी यह न भूलें कि आपकी पहचान आपकी डिग्री से नहीं, बल्कि आपके कर्मों से बनती है. सफलता और असफलता दोनों ही जीवन के स्वाभाविक पक्ष हैं, परंतु जो व्यक्ति असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ता है, वही स्थायी सफलता प्राप्त करता है. अपने भीतर मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखें, समाज के प्रति उत्तरदायी रहें और सदैव सत्य के पथ पर अग्रसर रहें. उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को क्रिसमस एवं नव वर्ष 2026 की शुभकामना दी.

दीक्षांत समारोह आखिरी पड़ाव नहीं, आगे के जीवन की शुरुआत : कुलपति

कुलपति प्रो चंद्रभूषण शर्मा ने कहा कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के लिए आज का यह दिन विशेष है, क्योंकि 10वां दीक्षांत समारोह पांच वर्षों बाद आयोजित हुआ है. उन्होंने उपाधि धारकों से कहा कि आपके लिए यह दीक्षांत समारोह आखिरी पड़ाव नहीं है, बल्कि आगे के जीवन की शुरुआत है. आज से आप अपनी मर्जी के अनुरूप कार्यक्षेत्र का चुनाव कर सकते हैं. आप अपने जीवन में उन मूल्यों को उतारें, जो मानवता के लिए कल्याणकारी हों. उन्होंने विवि का संक्षिप्त इतिहास रखते हुए उपलब्धियां, कमियां एवं योजनाओं से राज्यपाल को अवगत कराया. कहा कि विभावि की स्थापना 1992 में हुई. अब तक 33 वर्षों की यात्रा में इस विश्वविद्यालय ने उतार-चढ़ावों से भरे रास्तों पर चलते हुए शैक्षिक विकास के कई सपनों को तय किया है. हमारे विश्वविद्यालय से शिक्षित और दीक्षित विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धियों से हमारे उत्साह को कई गुना बढ़ाया है. विद्यार्थियों की उपलब्धियों की चमक से ही हमारा उत्साहवर्धन होता है और हममें दायित्व-बोध भी जागृत होता है. हमें जिन ऊंचाइयों तक पहुंचना है, वहां तक हमारे विद्यार्थी ही शिक्षकों की सहायता से पहुंचा सकते हैं.

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Author: SUNIL PRASAD

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