मूल निवासी संघ का धरना, बोले वक्ता संवैधानिक कर्तव्यों से पीछे हट रही है सरकार

हजारीबाग: निजीकरण के बढ़ते कदम को रोकने के उद्देश्य से मूलनिवासी संघ ने मंगलवार को समाहरणालय के समक्ष धरना दिया. इसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय महासचिव दयाराम ने की. सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मूलनिवासी संघ ब्राह्मण शासक जातियों का विरोध करता है. देश की सरकार अपने नैतिक एवं संवैधानिक कर्तव्यों से पीछे हट […]

हजारीबाग: निजीकरण के बढ़ते कदम को रोकने के उद्देश्य से मूलनिवासी संघ ने मंगलवार को समाहरणालय के समक्ष धरना दिया. इसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय महासचिव दयाराम ने की.

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मूलनिवासी संघ ब्राह्मण शासक जातियों का विरोध करता है. देश की सरकार अपने नैतिक एवं संवैधानिक कर्तव्यों से पीछे हट रही है. सरकार को संवैधानिक रूप से जनता के हितों की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों को ताक पर रखा गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमराज पटेल ने कहा कि निजी क्षेत्र में मूलनिवासी बहुजनों के लिए रास्ता बंद है. सिर्फ आरक्षण को समाप्त करने के लिए 90 प्रतिशत सरकारी नौकरियों में कटौती कर दी गयी है. शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार जैसे मूलभूत अधिकारों से बाह्मण शासक जातियों की षड़यंत्रकारी नीतियों के कारण मूलनिवासियों की पहुंच से दूर हो गयी है.

श्री पटेल ने कहा कि ये शासक जातियां मूल निवासी बहुजन समाज को गुलाम बनाने के लिए देश में निजीकरण, भूमंडलीकरण एवं उदारीकरण की आर्थिक नीतियों को लागू किया है. उन्होंने भाजपा का लक्ष्य हिंदू राष्ट्र निर्माण है, जिसमें पिछड़ी जातियों के लोगों को कोई संवैधानिक अधिकार नहीं होंगे. धरना को संघ के कई वक्ताओं ने भी संबोधित किया. धरना में संघ के दीपक दास, अशोक कुमार, पंकज कुमार, प्रवीण प्रियदर्शी, चंद्रदेव कुमार, नागो राम, विनय कुमार, सोनू ठाकुर, द्वारिका राम, विक्की कुमार, तिलेश्वर साव, मुकेश दास, राजाराम, अनंद पासवान, विनोद दास, मोहन कुमार, राजेंद्र राम, इलियास अंसारी समेत अन्य लोग मौजूद थे.

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