आयोजन: विश्व आदिवासी दिवस पर एकजुटता का आह्वान, बोले वक्ता भूमि,भाषा व संस्कृति को बचायें
हजारीबाग: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आदिवासी छात्र संघ की ओर से बुधवार को नगर भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यहां पारंपरिक गीत और नृत्य की झलक भी देखी गयी. मौके पर मौजूद बीआइटी मेसरा, रांची के शिक्षक प्रदीप मुंडा ने कहा कि आज आदिवासी छात्राओं को जागरूक होने की जरूरत है. […]
हजारीबाग: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आदिवासी छात्र संघ की ओर से बुधवार को नगर भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यहां पारंपरिक गीत और नृत्य की झलक भी देखी गयी. मौके पर मौजूद बीआइटी मेसरा, रांची के शिक्षक प्रदीप मुंडा ने कहा कि आज आदिवासी छात्राओं को जागरूक होने की जरूरत है. उन पर बड़ी जिम्मेवारी है. उन्होंने कहा: राज्य की सरकार हमें भूमिहीन करना चाहती है. युवाओं को किसी भी हाल में अपनी संस्कृति को बचाना होगा.
झारखंड की आदिवासी लड़कियां बाहर ही नहीं, राज्य में भी आया का काम कर रही हैं. छात्र आंदोलन का इस देश में लंबा इतिहास है. महात्मा गांधी के आंदोलन को ताकत देनेवाले युवा छात्र ही थे. जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी छात्र कूदे थे. आज छात्राओं भूमिका बढ़ गयी है. हमें शांतिपूर्ण तरीके से संवैधानिक प्रावधानों में तहत अधिकारों की लड़ाई लड़नी है.
हमें एकजुट होना होगा: आदिवासी छात्र संघ के उपाध्यक्ष सुशील ओड़ेया ने कहा कि आदिवासी का अर्थ पहले हमें समझना होगा. हमें अपनी संस्कृति एवं पहचान को हर जगह साबित करना होगा. उन्होंने कहा कि रघुवर सरकार आदिवासियों को उजाड़ने पर तूली है. हमें पूरी ताकत के साथ एकता स्थापित करना होगा. राज्य में सरकार शराब बेच रही है. सरकार ऐसा कर हमारी एकता को तोड़ना चाहती है. शराब एक सामाजिक बुराई है. इसका विरोध हमें हर जगह करना होगा. आदिवासी छात्रों को जागरूक होना होगा.
युवा बनें हुनरमंद: एसी दिलीप तिर्की ने कहा कि हमें सबसे पहले आदिवासियत पर चिंतन मनन करना है. इसके लिए अपनी भाषा एवं संस्कृति को बचाना होगा. हम अपने घर परिवार एवं जहां रहें, अपनी भाषा का प्रयोग करें.
इसी तरह नृत्य एवं संगीत आदिवासी संस्कृति का अंग हैं. इसके प्रति भी सजग रहें. उन्होंने कहा कि आदिवासी युवकों को हुनरमंद बनाना होगा. इसके लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठायें. साथ ही हम खेलकूद के क्षेत्र में अच्छा कर रहे हैं. कार्यक्रम दो सत्रों में था. पहले सत्र में भाषण का आयोजन, जबकि दूसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ. भाषण के बाद आदिवासी युवक व युवतियों ने पारंपरिक वेशभेषा में कार्यक्रम प्रस्तुत किया. साथ ही मैट्रिक एवं इंटर की परीक्षा में बेहतर परिणाम लानेवाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्षा सरोज लकड़ा एवं संचालन शिल्पा, सवीना लकड़ा, अनिल टुडू व निरंजन उरांव ने किया. मौके पर डेविड बोदरा, गोपाल लकड़ा, सविता खाका, किशोर हांसदा, विक्की धान, नरेश मुंडा, अनिल टोप्पो, रीता लिंडा, ममता टोप्पो, प्रदीप बेदिया, प्रकाश तिर्की, अजय टोप्पो, समन कच्छप, प्रिया कुमारी, सुप्रिया लकड़ा, सोनी, उषा, अंजन, पप्पू, निरंजन,संजय, बंधु, महेंद्र, नीतेश, विजय, समीर, दिलीप टोप्पो, संदीप उरांव, प्रेम हंसकांत, सुनील बेदिया समेत काफी संख्या युवक-युवतियां मौजूद थे.