हजारीबाग: नगर निगम ने तीन माह में मात्र 30 दुकानदारों को चिकेन-मटन दुकान चलाने का लाइसेंस दिया है. 98 दुकानदार लाइसेंस लेने के लिए परेशान हैं. नगर निगम कर्मी और पुलिसवाले इन दुकानदारों को परेशान कर रहे हैं. लाइसेंस के लिए आवेदन देनेवाले दुकानदारों को नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी एक माह में लाइसेंस देने का आश्वासन दिया था, जबकि आवेदन जमा किये तीन माह गुजर गये हैं. वहीं नगर विकास विभाग के सचिव अरुण कुमार सिंह सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर सिंगल विंडो सेल शहरी निकायों में स्थापित करने का निर्देश दिया है.
98 लोगों का आवेदन नगर निगम में लंबित : शहर व आसपास के 98 चिकेन, मटन व मछली बेचनेवाले लोगों का आवेदन नगर निगम में लंबित है. ये सभी लोग तीन माह पहले लाइसेंस बनाने के लिए नगर निगम में आवेदन जमा किया. अब ये लोग नगर निगम का चक्कर लगाकर थक गये हैं. नगर निगम कार्यपालक पदाधिकारी, कर्मचारी एवं अन्य पदाधिकारी इनलोगों की कोई मदद नहीं कर रहे हैं. जिन लोगों ने लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है, उन्हें कोई सूचना लिखित रूप से नहीं दी गयी है. आवेदन में और किसी प्रकार के कागज की आवश्यकता है. इसकी जानकारी नहीं दी गयी है.
लाइसेंस के लिए इनके आवेदन हैं लंबित: दुकानदार अली हसन, मिथलेश राम, नाजीम कुरैशी, पोखन साव, अनवर हुसैन, रोशन कुमार, राजेश कुमार, श्याम बाबू, विनीता भंडारी, मो आलम, बेनी राम, मोहन प्रसाद, सम्मी अख्तर, जाहिद हुसैन, विकास कुमार, गंदौरी प्रसाद, शहजाद इस्लाम, सुधाकर कुमार, मुनेश्वर कांदू, आशीष कुमार, इस्लाम कुरैशी, मो सलाम, मनीष कुमार, नरेश प्रसाद मेहता, सोनू विश्वकर्मा, कैलाश राम, वकील प्रसाद मेहता, शशि भूषण, मनीष कुमार, रोहित प्रसाद, इम्तियाज कुरैशी, बबलू, मो अकील, शमशेर, मो मुस्ताक, मीरा कुमार, राजेश कुमार, नूर मोहम्मद, मो शाहिद, मो नेजाम, शहनवाज, मो जमाल हासमी, गुलाम मुस्तफा, अफसर अली, गुलाम अबुल, मो फिरोज, अली हसन, मो शमीम, मो खैरून, वकील कुरैशी, कुतुबुद्दीन कुरैशी, शाकीब इस्लाम, कलाम कुरैशी, सन्नु कुरैशी, एनुल हक, इसराइल कुरैशी, मो सलीम कुरैशी, मो सराफ कुरैशी, नीरज राम, मनोज कुमार, इरशाद, मोइनउद्दीन, विजय कुमार पासवान, निजामुद्दीन, राजेंद्र कुमार, पूरन साव, फजल इमाम, मो अफजल हुसैन, आफताब अहमद, मो तबरेस अहमद, मो जुबैर कुरैशी, मो फारूक कुरैशी, मुन्ना कुरैशी, गुड्डू, हीरा कुमार, अजी अफजल, गुलाम मुस्तफा, मो फिरोज, अनुज प्रसाद मेहता, टुनटुन गुप्ता, इंताब कुरैशी, सुबोध कुमार सिन्हा, इम्तियाज, रूस्तम कुरैशी, मो शकील, मो सरवर, सरफराज, मो आसिफ, सुरेश साव, जुनैद अंसारी के आवेदन लंबित है.
नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह का निर्देश : सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर शहरी निकायों में सिंगल विंडो सेल स्थापित करने का निर्देश दिया है. प्रत्येक सप्ताह एक दिन निर्धारित कर दुकानों के लिए निबंधन या लाइसेंस तथा वधशालाओं की स्थापना के लिए एनओसी तथा लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पूरा करने को कहा है. नगर विकास विभाग के अनुरोध पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने सभी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एसीएमओ को उक्त निर्धारित तिथि को नगर निकायों में बैठक, मांस बिक्री दुकानों के निबंधन या लाइसेंस निर्गत करने का निर्देश दिया है.
चिकन-मटन बेचने के लिए क्या है नया नियम
चिकन-मटन बेचने के लिये नगर निगम से अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है. दुकानदार अपना आवेदन निगम के सिंगल विंडो में जमा कर सकते हैं. आवेदन के साथ एक शपथ पत्र देना होगा, जिसमें होल्डिंग टैक्स रसीद, जमीन का पेपर,आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, किराये के मकान होने पर इकरारनाम- पत्र एवं वार्ड पाषर्द की अनुशंसा होनी चाहिए.
किन्हें मिलेगा लाइसेंस : जिस दुकानदार के पास पक्का मकान वाली दुकान हो, उसमें शटर लगा हो, दुकान के फर्श टाइल्स व मार्बल लगा हो, मीट रखने की जगह पूरी तरह शीशा लगा हो, पानी की निकासी की व्यवस्था समेत अन्य सुविधाएं होनी चाहिए.
क्या है अनुज्ञप्ति लेने का शुल्क : चिकन-मटन बेचने के लिये इच्छुक दुकानदारों को अनुज्ञप्ति लेने के लिये एक हजार रुपये सलाना शुल्क जमा करना होगा. इसके अलावा दुकान के क्षेत्रफल के अनुसार प्रति वर्ग फीट 15 रुपये की राशि जमा करना होगा. वैसे दुकानदार जो नगर निगम में आवेदन दिये हैं ये लोग नगर निगम जाकर लाइसेंस लंबित के कारणों को जान सकते हैं. इसके लिए इन्हें नगर निगम के कर्मचारी निरंजन कुमार और शमीम से जानकारी ले सकते हैं.
सभी नियमों का पालन करना मुश्किल
मुफस्सिल थाना के आगे पतरातू रोड के पास बकरे का मीट बेचनेवाले सुरेश राम ने बताया कि हमलोग करीब 40 वर्षों से मीट बेचने का धंधा कर रहे हैं. अनुज्ञप्ति के लिये डेढ़ माह पूर्व आवेदन दिया है. सरकार के नये नियम से हमलोग सभी चिकन व मीट बेचनेवाले दुकानदार परेशान हैं. इन सभी नियमों का पालन करना मुश्किल है. 40 वर्ष पूर्व हजारीबाग में एक स्लाटर हाउस होता था. जहां कटनेवाले बकरे एवं मुर्गे की पहले जांच की जाती थी. उसके बाद वहां से कटे हुए बकरे की अापूर्ति दुकानदारों को की जाती थी.
कई आवेदनकर्ता नियमों का पालन नहीं कर रहे
नगर निगम कार्यपालक पदाधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि आवेदन करने के बाद एक माह के अंदर स्थल जांच कर अनुज्ञप्ति दी जायेगी. कई आवेदनकर्ता नियमों का पालन नहीं कर पा रहे हैं.
