चैनपुर. चैनपुर प्रखंड के लिगिंरपाठ गांव से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. बिचौलियों और ठगों के एक संगठित सिंडिकेट ने सीधे-सादे ग्रामीणों, बुजुर्गों और विशेष रूप से संरक्षित आदिम जनजाति परिवार के लोगों को अपना निशाना बनाया. सरकारी योजनाओं की राशि दिलाने के नाम पर उनके बैंक खातों से अंगूठे का निशान लगवा कर हजारों रुपये की निकासी कर ली गयी. पीड़ित मंगरा मुंडा अपनी वृद्धावस्था पेंशन निकालने की उम्मीद में बैंकिंग सुविधा केंद्र पहुंचे थे. आरोप है कि एक व्यक्ति ने मोबाइल और बायोमेट्रिक मशीन का उपयोग कर उनसे अंगूठा लगवाया और उनके खाते से पैसे निकाल लिए. मंगरा मुंडा की पत्नी फिरो मुंडा ने बताया कि बैंक ऑफ इंडिया के बीसी ने 21 फरवरी 2026 को उनका अंगूठा लगवाकर खाते से 10 हजार रुपये निकाल लिए. जब फिरो मुंडा ने पैसे मांगे, तो बीसी ने यह कह कर टाल दिया कि खाता बंद है और बैंक जाकर केवाइसी करवा लें. इसके बाद 24 फरवरी को उनके खाते से फिर 34 हजार रुपये की निकासी कर ली गयी. पीड़िता को केवल पांच हजार रुपये देकर घर भेज दिया गया. ठगी का दूसरा मामला आदिम जनजाति परिवार की दशमी असुर के साथ सामने आया. लिगिंरपाठ निवासी दशमी ने बताया कि रामपुर निवासी एक व्यक्ति ने उनका अंगूठा लगवा कर उनके खाते से 25 हजार रुपये निकाल लिए. इस चोरी का पता उन्हें तब चला, जब उन्होंने पोस्ट ऑफिस जाकर अपने खाते की जांच करवायी. जांच में खुलासा हुआ कि यह निकासी पोस्ट ऑफिस के एक कर्मी की आइडी का उपयोग कर की गयी थी. मामले के तूल पकड़ने और ग्रामीणों के संगठित विरोध के बाद बिचौलियों पर दबाव बनाया गया. काफी जद्दोजहद के बाद आरोपी बिचौलिये ने ठगी की पूरी राशि वापस कर दी.
अंगूठा लगवा कर खातों से उड़ाये हजारों रुपये, विरोध के बाद किये वापस
बिचौलियों ने सरकारी योजना का पैसा दिलाने के नाम पर ग्रामीणों, बुजुर्गों व आदिम जनजाति परिवारों को बनाया था शिकार
