Teacher's Day Special : शिक्षक सिर्फ किताब नहीं पढ़ाता, जीवन की दिशा भी तय करता है

शिक्षक दिवस पर शिक्षक उत्तम कुमार मुखर्जी ने कहा कि शिक्षक अज्ञानता को दूर कर विद्यार्थियों के जीवन को संवारते हैं और उन्हें एक बेहतर नागरिक बनाते हैं.

गुमला. शिक्षक दिवस पर शिक्षक की भूमिका और महत्व को रेखांकित करते हुए पीएम श्री एसएस प्लस टू उवि रायडीह के संस्कृत शिक्षक उत्तम कुमार मुखर्जी ने कहा है कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन का पथप्रदर्शक होता है.

शिक्षक दिवस सिर्फ सम्मान का दिन नहीं

उन्होंने कहा कि हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाना केवल शिक्षकों को सम्मान देने का अवसर नहीं, बल्कि महान गुरु-परंपरा और डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों को स्मरण करने का दिन भी है. यह परंपरा सदियों से ज्ञान और चरित्र निर्माण की नींव रही है, जिसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण गुरु द्रोणाचार्य और एकलव्य की कहानी है, जहाँ गुरु की शिक्षाओं ने शिष्य के जीवन को आकार दिया.

उन्होंने कहा कि शिक्षक अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करता है. वह विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ-साथ सत्य, अनुशासन, आत्मविश्वास, संस्कार और मानवीय मूल्यों का विकास करता है.

विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाता है शिक्षक

एक विद्यार्थी जब विद्यालय में प्रवेश करता है तो वह अनेक सपनों, उम्मीदों और सवालों के साथ आता है. बच्चा स्कूल की दहलीज पर कदम रखते हुए शायद पहली बार अपने लिए एक उज्ज्वल भविष्य का सपना देखता है, या मन में अनगिनत सवाल लिए आता है कि वह दुनिया को कैसे समझेगा. शिक्षक उसे सही दिशा दिखाकर उसके मन में विश्वास जगाता है और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है. उत्तम कुमार मुखर्जी ने कहा कि आज तकनीक और सूचनाओं का विस्तार तेजी से हुआ है.

विद्यार्थी एक क्लिक पर ढेरों जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं. तकनीक हमें जानकारी तक त्वरित पहुँच देती है, पर यह शिक्षकों द्वारा प्रदान की जाने वाली संवेदना, संस्कार और मानवीय मूल्यों की जगह नहीं ले सकती. शिक्षक ही विद्यार्थियों को एक सफल व्यक्ति के साथ-साथ अच्छा नागरिक बनने की प्रेरणा देता है.

शिक्षकों के बताये मार्ग पर चलने की अपील

उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों का सम्मान करने, उनसे सीखने की जिज्ञासा रखने और उनके बताये मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाने की अपील की.

सोचिए, अगर आपके शिक्षक न होते तो क्या आप आज जहाँ हैं, वहाँ होते?

उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम अपने शिक्षकों के ऋण को कभी नहीं भूलेंगे और उनके दिए ज्ञान, संस्कार व मूल्यों को जीवन में उतारकर समाज और राष्ट्र की सेवा करेंगे.

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ज्ञानलोक में शिक्षक से बढ़कर कोई सृष्टि-कर्ता नहीं

उन्होंने अंत में कहा कि ईश्वर द्वारा बनाई गई इस सृष्टि को श्रेष्ठ और सार्थक बनाने का कार्य शिक्षक करता है, इसीलिए यह कहा गया है कि ज्ञान के लोक में शिक्षक से बढ़कर कोई निर्माता नहीं.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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