रोहतास गढ़ तीर्थयात्रा एक फरवरी को, गुमला से हजारों लोग होंगे शामिल

रोहतास गढ़ तीर्थयात्रा एक फरवरी को, गुमला से हजारों लोग होंगे शामिल

By Prabhat Khabar News Desk | January 5, 2026 10:19 PM

गुमला. जनजातीय समाज की प्राचीन धरोहर रोहतास गढ़ तीर्थयात्रा को लेकर रोहतास गढ़ तीर्थयात्रा संचालन समिति गुमला ने सोमवार को होटल बिंदेश में प्रेसवार्ता की. प्रेसवार्ता में देवेंद्र लाल उरांव, खेदू नायक, सोमेश्वर, सोनामनी उरांव, राजू उरांव, राजबेल उरांव, चंपा कुमारी, मंगल सिंह भोगता, लक्ष्मीकांत बड़ाइक व इंदू देवी शामिल रहे. संचालन समिति के सदस्यों ने बताया गया कि इस साल 20वां रोहतास गढ़ तीर्थयात्रा एक फरवरी को होने जा रही है. उन्होंने बताया कि रोहतास गढ़ किला रोहतास (बिहार) जिला में अवस्थित है. मान्यता है कि रोहतास गढ़ जनजातीय समाज के पूर्वजों का प्राचीन धरोहर है. यहां मुगल आक्रमणकारियों के पूर्व उरांव, खरवार व चेरों जनजाती राजाओं का साम्राज्य हुआ करता था, जिसे उरांव राजा के शासनकाल का स्वर्णकाल भी माना गया है. मान्यताओं के अनुसार उरांव समाज का उदभव यहीं से हुआ है. उरांव राजा उरगन ठाकुर यहां के राजा था. यहां उरांव वीरांगन सिनगी दई व कैली दई के नेतृत्व में मुगल पठानों से तीन बार युद्ध लड़ा गया. तीनों युद्ध को उरांव ने जीता. लेकिन बाद उरांव समाज के लोग पूर्वजों के धरोहर रोहतास गढ़ से पलायन कर गये. यहीं से उरांव समाज की महिलाओं के चेहरों पर तीन लकीर का गोदना की परंपरा की शुरुआत हुई. जनजाति समाज महादेव को अपना बड़ा देवा और भगवान मानते हैं. पार्वती मां को देवी के रूप में आराधना व पूजा करते हैं. रोहतास गढ़ में महादेव-पार्वती मंदिर आज भी है. यहां हर साल माघी पूर्णिमा के पवित्र दिन तीर्थयात्रा का आयोजन होता है. उक्त तीर्थयात्रा में गुमला जिले से हजारों की संख्या में तीर्थयात्री भाग लेंगे.

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