गुमला: आदिवासी छात्र संघ केंद्रीय समिति, रांची और विभिन्न प्रखंड समितियों की संयुक्त बैठक उरांव सरना क्लब, दुंदुरिया, गुमला में हुई. बैठक में सरना धर्म कोड लागू कराने, परिसीमन का विरोध, नियोजन नीति और स्थानीय नीति समेत आदिवासी समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में सरना कोड लागू कराने और परिसीमन के विरोध में गुमला में महारैली आयोजित करने का निर्णय लिया गया.
20 अगस्त को होगी विस्तृत घोषणा
महारैली की तारीख और कार्यक्रम की विस्तृत घोषणा 20 अगस्त 2026 को सरना सम्मेलन मैदान, कार्तिक उरांव कॉलेज परिसर, गुमला में होने वाली बैठक में की जाएगी. यह बैठक दोपहर 12 बजे से आयोजित होगी. संघ के नेताओं ने अधिक से अधिक लोगों से बैठक में शामिल होने की अपील की.
'सरना कोड नहीं तो जनगणना नहीं' का नारा
बैठक में वक्ताओं ने कहा, "सरना कोड नहीं तो जनगणना नहीं, जनगणना नहीं तो परिसीमन नहीं." उन्होंने आरोप लगाया कि एक साजिश के तहत आदिवासियों की आबादी को कम दिखाने का प्रयास किया जा रहा है. वक्ताओं के अनुसार, इसका असर भविष्य में आरक्षण, रोजगार और विधायक-सांसद समेत अन्य राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है. वक्ताओं ने कहा कि सरना धर्म कोड नहीं होने की स्थिति में आदिवासियों की धार्मिक पहचान को दूसरे धर्म के कोड में दर्ज किए जाने का खतरा बना रहेगा. इससे आदिवासी समाज की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है. बैठक में जनगणना के ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए आदिवासी धर्म की अलग पहचान दर्ज करने की मांग दोहराई गई.
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जेपीएससी-जेएसएससी और नियोजन नीति पर सरकार को घेरा
बैठक में जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 28 वर्ष बाद भी नियोजन नीति और स्थानीय नीति का स्थायी समाधान नहीं होना चिंता का विषय है. संघ ने 1932 के खतियान को आधार बनाकर नियोजन नीति तैयार करने की मांग दोहराई. छात्र नेताओं ने कहा कि स्थानीय युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए.
खनिज संशोधन विधेयक का विरोध
बैठक में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 का भी विरोध किया गया. छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि यह विधेयक झारखंड के खनिज संसाधनों के दोहन को बढ़ावा देने वाला है. उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज करने की बात कही. बैठक में जतरु उरांव, डॉ. सुशील कुमार, प्रो. शतीश कुमार भगत, प्रदेश अध्यक्ष मंगल उरांव, फकीर चंद उरांव, अमीन उरांव, मुकेश भगत, शत्रुधन बड़ाईक, बुधेश्वर उरांव, उदय उरांव, सचिन उरांव, दीपक उरांव, सगेम उरांव, प्रमोद उरांव, मनीराम उरांव, विशाल भगत, कुलदीप, आशीष, कोटले उरांव और श्रवण उरांव मिंज समेत अन्य लोग मौजूद थे. बैठक का संचालन अहलाद उरांव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन राज उरांव ने किया.
