गुमलाः गुमला जिले के विभिन्न प्रखंडों में ध्वस्त और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों ने दर्जनों गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. कहीं पुल को ध्वस्त हुए दो साल बीत चुके हैं, तो कहीं पुल का पिलर धंसने के नौ साल बाद भी ग्रामीण नये पुल का इंतजार कर रहे हैं. इसके बावजूद मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हुई है.
बरसात के मौसम में इन पुल-पुलियों की स्थिति और गंभीर हो जाती है. कई गांवों का संपर्क लगभग टापू जैसा हो जाता है. नदी और नालों में पानी कम होने पर ही ग्रामीण किसी तरह आवागमन कर पाते हैं. वहीं, कई स्थानों पर लोग जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त पुलों को पार करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान हादसे का डर बना रहता है, लेकिन उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है.
सिसई : दो करोड़ का पुल दो साल पहले ध्वस्त, अब तक नहीं बना
सिसई प्रखंड के डड़हा भाया छारदा पथ में जैरा के पास कंस नदी पर बना ग्रामीण पुल करीब दो वर्ष पहले ध्वस्त हो गया था. इसके बावजूद अब तक इसका पुनर्निर्माण नहीं कराया गया है. करीब दो करोड़ रुपए की लागत से वर्ष 2007-08 में इस पुल का निर्माण कराया गया था.
यह सड़क लोहरदगा जिले को डड़हा गांव के पास नेशनल हाइवे से जोड़ती है. पुल के ध्वस्त होने से डड़हा होकर लोहरदगा जाने वाले यात्रियों के अलावा जैरा, करकरी, बघनी, बुड़का, छारदा, बरंदा, पहामु, भुरसो समेत दर्जनों गांवों के लोग प्रभावित हैं. ग्रामीणों को आवागमन के लिए लंबा और असुविधाजनक रास्ता अपनाना पड़ रहा है.
बिशुनपुर : जर्जर पुलिया से 130 परिवार प्रभावित
बिशुनपुर प्रखंड के पूर्व नक्सल प्रभावित कुमारी गांव में महादेव टोंगरी के पास वर्षों पहले बनी पुलिया करीब एक साल से क्षतिग्रस्त है. इससे कुमारी गांव के करीब 80 और गोताख गांव के लगभग 50 परिवार प्रभावित हैं. पुलिया जर्जर होने के कारण ग्रामीण लकड़ी के सहारे जान जोखिम में डालकर इसे पार कर रहे हैं.
ग्रामीण रतनलाल उरांव ने बताया कि पिछले वर्ष बारिश के दौरान पुलिया क्षतिग्रस्त हुई थी, लेकिन अब तक इसका निर्माण नहीं कराया गया है. बरसात में पुलिया के नीचे पानी का बहाव तेज हो जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. ग्रामीणों ने प्रखंड प्रमुख राजलक्ष्मी उरांव और राजू भगत से मुलाकात कर पुलिया के पुनर्निर्माण की मांग की है.
रायडीह : 2017 में धंसा पिलर, नौ साल बाद भी इंतजार
रायडीह प्रखंड में शंख नदी पर बना मरियम टोली पुल वर्ष 2017 में बाढ़ और तेज जल प्रवाह के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था. पुल का पिलर धंसने के बाद से ही ग्रामीण इसी जर्जर पुल से जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं. प्रशासन की ओर से पुल के दोनों छोर पर बोर्ड लगाकर आवागमन नहीं करने की चेतावनी दी गई है. इसके बावजूद करीब 50 गांवों के लोगों के लिए यही पुल आवागमन का प्रमुख साधन बना हुआ है.
मजबूरी में ग्रामीण जोखिम उठाकर पुल पार करते हैं. इस पुल का निर्माण विशेष प्रमंडल, गुमला की ओर से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था. ग्रामीणों का कहना है कि पुल की स्थिति लंबे समय से खराब है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है.
पालकोट : टूटे पुल से रोज गुजरते हैं ग्रामीण और छात्र
पालकोट प्रखंड मुख्यालय से बाजारटांड़ होते हुए कुल्लूकेरा और झीकीरीमा पंचायत जाने वाली सड़क पर पहान टोली गांव के पास छोटका बाघलता का टूटा पुल ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. पुल क्षतिग्रस्त होने के बावजूद लोग रोज जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं. इस रास्ते से पाकर टोली, कुरा, चोरडाड़, पानीसानी, पुटकल टोली, कुल्लूकेरा, मुराई टोली, डुमरटोली, भुसड़ी टोली और सारूबेड़ा के ग्रामीण आते-जाते हैं.
कंदर्प उच्च विद्यालय, मध्य विद्यालय, संत जोसेफ उच्च विद्यालय करौंदाबेड़ा और संत मारिया उच्च विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं भी प्रतिदिन इसी टूटे पुल से होकर स्कूल पहुंचते हैं. बरसात के दिनों में पुल से गुजरना और भी खतरनाक हो जाता है. ग्रामीणों ने पुल की जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि पुल के सुरक्षित नहीं होने से रोजाना दुर्घटना का खतरा बना रहता है. ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन जल्द पहल कर पुल का स्थायी समाधान करे, ताकि आवागमन सुरक्षित हो सके.
