बसिया-पालकोट में आम बागवानी से बदली दीदियों की तस्वीर

सफलता परियोजना और एफपीओ के सहयोग से किसानों की बढ़ी आय

बसिया. बसिया और पालकोट प्रखंड में प्रदान संस्था के मार्गदर्शन में सफलता परियोजना व एफपीओ के माध्यम से लोहड़ी, तेतरा, लिटीम, कुरूम समेत कई गांवों में आम बागवानी को बढ़ावा दिया गया है. पिछले दो वर्षों से बेहतर फल उत्पादन के लिए बागानों में सेंट्रल ओपनिंग करायी गयी. साथ ही मंजर आने के दौरान जिंक, बोरोन और पोटैशियम नाइट्रेट का तीन बार छिड़काव कराया गया. मटर के दाने के आकार का फल आने पर प्लानोफिक्स व बोरोन का छिड़काव 15 से 20 दिनों के अंतराल पर तीन बार किया गया. इसके सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं और इस वर्ष आम की पैदावार काफी अच्छी हुई है. फल तैयार होने के बाद एफपीओ द्वारा आम की मार्केटिंग की जा रही है, जिससे आम बागवानी से जुड़ी लाभुक महिलाएं अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं. आम की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए वर्ष 2026 में पहली बार पेपर पैकिंग तकनीक का भी प्रयोग किया गया है. सभी लाभुक महिलाएं एफपीओ की सदस्य हैं. इधर, कृषि विज्ञान केंद्र बिशुनपुर के वैज्ञानिक भी गांवों में पहुंचकर किसानों को दवा और खाद के संतुलित उपयोग को लेकर प्रशिक्षण दे रहे हैं. इस साल बेहतर उत्पादन से उत्साहित महिलाओं ने आम बिक्री से लाखों रुपये कमाने का लक्ष्य रखा है. महिलाओं का कहना है कि उन्होंने प्रति पौधा एक हजार रुपये आय का जो सपना देखा था, वह अब साकार होता नजर आ रहा है. किसी लाभुक के पास 100 तो किसी के पास 50 आम के पेड़ हैं. हालांकि महिलाओं ने यह भी कहा कि उनके पास आम का अच्छा उत्पादन तो है, लेकिन लंबे समय तक भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं है. यदि कोल्ड स्टोरेज या रखरखाव की सुविधा उपलब्ध हो जाये, तो इससे और अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं.

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