डुमरी. आकांक्षी प्रखंड में आदिवासी समाज की मातृभाषा, सभ्यता, संस्कृति और पारंपरिक जीवन-पद्धति को संरक्षित और आगे बढ़ाने की दिशा में भागीटोली स्थित कुड़ुख कत्थ खोड़हा लुरकुड़िया एडपा विद्यालय लगातार प्रयासरत है. करीबन 25 वर्ष पूर्व से आदिवासी मातृभाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लुरकुड़िया एडपा भागीटोली में इस विद्यालय की स्थापना की गयी थी.
विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर एतवा उरांव उर्फ जेफ्रियानुस बाखला ने आदिवासी बहुल क्षेत्र में सात जनवरी 2000 ईस्वी में इसकी नींव रखी. उनका उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना था, जो अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े रहकर आधुनिक शिक्षा भी प्राप्त कर सकें. विद्यालय में बच्चों के रहने और भोजन की व्यवस्था भी की गयी है.
यहां वर्ग एक से 10 तक की पढ़ाई होती है. जहां वर्तमान में करीब 351 छात्र-छात्राएं रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. जिसमें छत्तीसगढ़ के छह, लोहरदगा के 150, रांची के 20, डुमरी के 110 सहित बिहार के रोहतासगढ़ क्षेत्र से 65 बच्चे शिक्षा ले रहे हैं. विद्यालय में कुल 16 शिक्षिकाएं शिक्षा दे रही हैं.
आधुनिक शिक्षा पर भी जोर
विद्यालय में बच्चों को कुड़ुख भाषा के साथ-साथ आदिवासी समाज की सभ्यता, संस्कृति, रीति-रिवाज, रहन-सहन, धार्मिक एवं सामाजिक परंपराओं की जानकारी दी जाती है. पारंपरिक भेष-भूषा, लोक संस्कृति और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं से बच्चों को परिचित कराने का भी प्रयास किया जाता है. विद्यालय की खासियत यह है कि यहां मातृभाषा के संरक्षण के साथ आधुनिक शिक्षा पर भी जोर दिया जाता है.
मातृभाषा के साथ आधुनिक शिक्षा जरूरी : निदेशक
विद्यालय के प्रभारी निदेशक अजीत एक्का ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है. इस विद्यालय का मुख्य उद्देश्य आदिवासी बच्चों को अपनी मातृभाषा कुड़ुख, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है. विद्यालय में बच्चों को कुड़ुख भाषा के साथ आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों, रहन-सहन और पारंपरिक भेष-भूषा के बारे में व्यवहारिक रूप से जानकारी दी जाती है.
