आंदोलन स्थल पर करम पर्व | Prabhat Khabar Network

हिंडाल्को के खिलाफ आंदोलन के बीच मना करम पर्व, सड़क की मांग पर डटे ग्रामीण, आंदोलन स्थल पर गाड़ा करम डाली

हिंडाल्को के खिलाफ सड़क निर्माण की मांग पर डटे आंदोलनकारियों ने करम पर्व का उत्सव आंदोलन स्थल पर ही मनाया. परंपरा और संघर्ष साथ-साथ जारी.

अजित कुमार साहू की रिपोर्ट

घाघरा (गुमला). घाघरा प्रखंड में हिंडाल्को के विरुद्ध चल रहे आंदोलन के नौवें दिन मंगलवार को भी सैकड़ों आंदोलनकारी सड़क निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन स्थल पर डटे रहे. करम पर्व के मौके पर आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष के बीच आंदोलन स्थल पर ही पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पर्व मनाया. इससे पूरे दिन आंदोलन स्थल पर संघर्ष के साथ पर्व का उत्साह भी देखने को मिला.

आंदोलनकारी पारंपरिक वेशभूषा में आंदोलन स्थल पहुंचे

करम पर्व को लेकर बड़ी संख्या में माता-बहनें और अन्य आंदोलनकारी पारंपरिक वेशभूषा में आंदोलन स्थल पहुंचे. यहां करम डाली गाड़कर विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. पूजा के बाद ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक गीत और नृत्य का आयोजन हुआ. आंदोलनकारियों ने सामूहिक रूप से करम पर्व की खुशियां मनायीं.

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घर से पकवान लेकर पहुंचीं महिलाएं

पर्व को लेकर कई महिलाएं अपने घरों से पारंपरिक पकवान बनाकर आंदोलन स्थल पर लेकर पहुंचीं. इसके बाद सभी आंदोलनकारियों ने मिल-जुलकर पकवान का आनंद लिया. आंदोलन स्थल पर एक ओर सड़क निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहा, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक तरीके से करम पर्व मनाया गया.

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हिंडाल्को के विरुद्ध आंदोलन जारी

आंदोलनकारी सूरज नायक ने कहा कि हिंडाल्को के विरुद्ध उनका आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि मांग पूरी होने तक आंदोलनकारी आंदोलन स्थल छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हैं. उनके अनुसार, संघर्ष के साथ अपनी परंपरा, संस्कृति और सभ्यता को भी जीवंत रखना जरूरी है. इसी उद्देश्य से आंदोलन स्थल पर ही करम पर्व मनाने का निर्णय लिया गया. आंदोलनकारियों ने कहा कि करम पर्व मनाने के बावजूद सड़क निर्माण की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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