बेंगलुरु में काम करने गए मजदूर घनश्याम की मौत, अस्पताल ने थमाया 1 लाख का बिल

बेंगलुरु में मजदूरी करने गए गुमला के घनश्याम लोहार की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से करीब एक लाख रुपये का बिल मांगा. सिमडेगा विधायक के प्रतिनिधि मनीष कुमार साहू ने पहल कर बिल माफ करवाया और शव को एयर एंबुलेंस से गुमला लाया गया.

गुमलाः बेंगलुरु में मजदूरी करने गए गुमला निवासी घनश्याम लोहार की इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में मौत हो गई. मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को करीब एक लाख रुपए का बिल थमा दिया. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने एक ओर अपने सदस्य को खोने का गम था, तो वहीं, उनके सामने घनश्याम के शव को बेंगलुरु से गुमला लाने की चिंता खड़ी हो गई. ऐसे मुश्किल समय में सिमडेगा विधायक के प्रतिनिधि सह गुमला नगर परिषद के वार्ड आयुक्त मनीष कुमार साहू ने पहल कर परिवार की मदद की.

अस्पताल प्रबंधन से बात कर माफ कराया बिल

मामले की जानकारी मिलने के बाद मनीष कुमार साहू ने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया. उन्होंने घनश्याम के परिजनों की आर्थिक स्थिति से अस्पताल प्रबंधन को अवगत कराया और बिल माफ करने का आग्रह किया. उनकी पहल के बाद अस्पताल प्रबंधन ने करीब एक लाख रुपए का बिल माफ कर दिया. इससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली.

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एयर एंबुलेंस के जरिए बेंगलुरु से रांची लाया गया शव

अस्पताल का बिल माफ होने के बाद घनश्याम के शव को एयर एंबुलेंस के माध्यम से बेंगलुरु से रांची लाने की व्यवस्था की गई. शव रांची पहुंचने के बाद उसे गुमला लाया गया. इसके बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार किया. घनश्याम की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है.

संकट की घड़ी में मदद के लिए जताया आभार

वहीं, मृतक घनश्याम के परिजनों ने मनीष कुमार साहू के प्रति आभार जताया. परिजनों ने कहा कि जरूरतमंद और गरीब लोगों की मदद के लिए मनीष कुमार साहू हमेशा आगे आते रहे हैं. संकट की घड़ी में वे आर्थिक सहयोग भी करते हैं. इस मुश्किल समय में उन्होंने परिवार की मदद कर बड़ी राहत पहुंचाई.

इधर, मनीष कुमार साहू ने कहा कि घनश्याम की मौत और अस्पताल द्वारा करीब एक लाख रुपए का बिल दिए जाने की जानकारी मिलते ही उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से बात की. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की स्थिति को देखते हुए परिजनों की मदद का प्रयास किया गया, जिसके बाद अस्पताल का बिल माफ कराया जा सका.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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