गुमला : गुमला जिला अंतर्गत विमरला, गुरदरी एवं अमतीपानी माइंस क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी. उक्त माइंस क्षेत्र की तस्वीर बदलने के साथ क्षेत्र में निवास करनेवाले जनजातीय लोगों की भी तकदीर बदलेगी. इसके लिए उक्त क्षेत्रों में तीन से चार करोड़ रुपये खर्च किया जायेगा. यह राशि हिंडालको प्रबंधन खर्च करेगा. विमरला, गुरदरी एवं अमतीपानी माइंस क्षेत्र के विकास और वहां रह रहे लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है.
कार्य योजना तैयार होने के बाद प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही कार्य शुरू हो जायेगा. इस संबंध में वन प्रमंडल गुमला के डीएफओ श्रीकांत ने बताया कि हिंडालको प्रबंधन द्वारा विगत 15 वर्षों से भी अधिक समय से गुमला जिला के घाघरा, बिशुनपुर एवं लोहरदगा जिला से बॉक्साइट का उत्खनन कर रहा है. जिसमें गुमला जिला में विमरला, गुरदरी एवं अमतीपानी प्रमुख माइंस क्षेत्र है. बॉक्साइट माइनिंग के दौरान पर्यावरण को सुरक्षित रखना है.
क्षेत्र का विकास करना है. साथ ही स्थानीय जनजातीय समुदाय के लोगों के लिए सुविधाएं मुहैया कराना है. परंतु हिंडालको प्रबंधन द्वारा इस दिशा में ध्यान नहीं दिया जा रहा है. डीएफओ ने बताया कि उन्होंने इन सभी चीजों को लेकर माइंस क्षेत्रों का दौरा कर गहन समीक्षा की. समीक्षा में उन्होंने बताया कि क्षेत्र और जनजातीय समुदायों के लिए हिंडालको प्रबंधन को जो काम करना था. वह काम नहीं हो रहा है. डीएफओ ने बताया कि क्षेत्र का दौरा कर गहन समीक्षा करने के बाद क्षेत्र और जनजातीय समुदाय के लोगों के विकास के लिए हिंडालको प्रबंधन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से कार्ययोजना तैयार किया जा रहा है. संभावना है कि तीन से चार करोड़ रुपये की कार्य योजना तैयार की जायेगी.
इन योजनाओं पर होगा काम :
डीएफओ ने बताया कि विमरला, गुरदरी एवं अमतीपानी माइंस क्षेत्र एवं स्थानीय जनजातीय समुदाय के लोगों के विकास के लिए क्षेत्र में जल संरक्षण पर विशेष रूप से काम होगा. माइंस क्षेत्रों में पानी की बड़ी समस्या है. इस समस्या के निदान के लिए क्षेत्र में चेकडैम का निर्माण एवं तालाबों का जीर्णोद्धार होगा. क्षेत्र के लोगों को बिजली की समस्या न हो. इसके लिए सोलर लाइट लगाया जायेगा. साथ ही क्षेत्र के सरना स्थलों का सुंदरीकरण किया जायेगा. बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए स्कूल खोला जायेगा और आवागमन की सुविधा के लिए पक्की सड़कों का भी निर्माण किया जायेगा. साथ ही वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण पर भी काम होगा.
Posted By : Sameer Oraon
