गुमला में कानून का चला डंडा: मासूम से दरिंदगी के दोषी गोपी लोहरा को 20 साल की जेल, कोर्ट ने सुनाया सख्त फैसला

Gumla Crime News: गुमला में मासूम बच्ची के साथ हैवानियत करने वाले गोपी लोहरा को अदालत ने उसके पापों की सजा दे दी है. विशेष न्यायाधीश संजीव भाटिया की अदालत ने दोषी को पोक्सो एक्ट के तहत 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है.

Gumla Crime News, गुमला (दुर्जय पासवान की रिपोर्ट): गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत एक आठ वर्षीय बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में सोमवार को अदालत ने निर्णायक फैसला सुनाया है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-4 सह विशेष न्यायाधीश (पोक्सो), संजीव भाटिया की बेंच ने आरोपी 35 वर्षीय गोपी लोहरा को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे समाज के लिए एक कलंक माना और कानून की अधिकतम धाराओं के तहत दोषी को दंडित किया.

खेल रही बच्ची का जंगल से अपहरण

ये घटना 5 फरवरी 2024 की शाम करीब 6:15 बजे की है, जब सदान बुकमा निवासी गोपी लोहरा ने उस समय मासूम का अपहरण कर लिया था, जब वह अपने दोस्तों के साथ गांव में ही खेल रही थी. बच्ची के साथ खेल रहे उसके तीन-चार दोस्तों ने तुरंत घर जाकर इसकी जानकारी उसकी मां को दी. डरी हुई उसकी मां करीब एक घंटे तक अपनी बच्ची को इधर-उधर ढूंढती रही. इस दौरान उनका सामना जंगल की ओर से लौट रहे गोपी लोहरा से हो गयी.

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जुर्म कबूल कर दी जान से मारने की धमकी

गोपी लोहरा ने अपनी हैवानियत की बात पीड़ित की मां के सामने ही कबूल कर ली. उसने धमकी देते हुए उससे कहा कि उसने ही बच्ची के साथ गलत किया है और यदि पुलिस को इसकी जानकारी दी गई, तो वह पूरे परिवार को जान से मार देगा. इस धमकी के बाद वह जंगल की ओर भाग निकला. हालांकि, पीड़िता की मां ने हिम्मत दिखाते हुए गांव के एक व्यक्ति को पूरी बात बताई और पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद 6 फरवरी 2024 की रात चैनपुर थाना में कांड संख्या 07/2024 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.

दोषी को जेल की सजा

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के आधार पर गोपी लोहरा को कड़ी सजा सुनाई. आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) के तहत उसे सात वर्ष का कारावास और दस हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है. वहीं, पोक्सो एक्ट की धारा छह के तहत उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है. अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा करने में विफल रहता है, तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

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By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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