गुमला. गुमला शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के सरकारी दावों की सच्चाई मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक साफ देखी जा सकती है. शहर में एक निश्चित स्थान पर कचरा डालने के लिए एक बार नहीं, बल्कि कई बार कूड़ादान लगाये गये. लाखों रुपये की लागत से शहर के विभिन्न स्थानों पर डस्टबीन लगाये गये थे, लेकिन इसके बावजूद आज भी सड़क किनारे और मुहल्लों के खुले मैदानों में कचरे का अंबार दिखायी देता है. डस्टबीन की स्थिति देखें तो यह सरकारी राशि की बर्बादी की कहानी बयान करता नजर आता है. शहर में अभी भी कई जगहों पर स्टील डस्टबीन के खाली स्टैंड खड़े दिखायी देते हैं. कहीं-कहीं स्टैंड के साथ डस्टबीन का डब्बा भी नजर आ जाता है, लेकिन अधिकांश स्थानों से डस्टबीन गायब हो चुके हैं. नगर परिषद कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार लगभग चार-पांच साल पहले लाखों रुपये की लागत से शहर के करीब 200 स्थानों पर डस्टबीन लगाये गये थे. इनमें दो अलग-अलग डब्बे लगाये गए थे, जिनमें एक में सूखा और दूसरे में गीला कचरा डालने की व्यवस्था थी. लेकिन आज वे डस्टबीन कहीं नजर नहीं आते. यदि कहीं पूरी डस्टबीन दिख भी जाये, तो इसे उस सरकारी राशि की खुशनसीबी कही जायेगा, जिससे उनकी खरीदारी की गयी थी. दरअसल, इस योजना के क्रियान्वयन में दूरदर्शिता की कमी साफ दिखती है. न तो डस्टबीन की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये और न ही समय पर उनके रख-रखाव पर ध्यान दिया गया. कुछ असामाजिक तत्वों ने डस्टबीन उखाड़ कर कबाड़ में बेच दिये, जबकि कुछ देख-रेख के अभाव में नष्ट हो गये. आज खाली खड़े स्टैंड शहर की सुंदरता बढ़ाने के बजाय प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन गये हैं.
नयी उम्मीद या पुराना ढर्रा
14 मार्च को नगर परिषद गुमला में भाजपा समर्थित शकुंतला उरांव जिलाध्यक्ष के रूप में शपथ लेंगी. इसके साथ ही उपाध्यक्ष और सभी 22 वार्डों के निर्वाचित पार्षदों का भी शपथ ग्रहण समारोह होगा. ऐसे में शहरवासियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार गुमला सच में गंदगी से मुक्त होगा या फिर पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी. लोगों को उम्मीद है कि नये जनप्रतिनिधि शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारते हुए ठोस कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था लागू करेंगे. वहीं यह आशंका भी बनी हुई है कि कहीं फिर से योजनाओं के नाम पर केवल औपचारिकता ही न हो.
विकास के नाम पर अंधेरा, जनता में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन अक्सर टेंडर निकालने और सामान खरीदने तक ही सीमित रहता है. लेकिन उन योजनाओं का लाभ आम जनता को मिल रहा है या नहीं, इसकी कोई प्रभावी निगरानी नहीं होती. डस्टबीन के गायब हो जाने के कारण लोग मजबूरी में फिर से सड़कों और गलियों के किनारे ही कचरा फेंक रहे हैं. इससे शहर में गंदगी बढ़ रही है और लोग इस अव्यवस्था को लेकर नाराजगी जता रहे हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि 14 मार्च के बाद गुमला शहर की तस्वीर बदलती है या फिर विकास का यह ढांचा यूं ही भ्रष्टाचार और लापरवाही की गवाही देता रहेगा.
कूड़ेदान में कचरा डालें, तो सड़क व गलियां रहेंगी साफ : हेलाल अहमद
शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर नगर परिषद के सिटी मैनेजर हेलाल अहमद का कहना है कि शहर को कचरा मुक्त बनाने का प्रयास लगातार किया जा रहा है. वर्तमान में शहर में कचरा संग्रहण के लिए रोजाना कचरा वाहन चलाये जा रहे हैं, जो घर-घर जाकर कचरा एकत्र कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि नगर परिषद का कार्य शहर में झाड़ू लगाना और नालियों की सफाई करना है, जबकि कचरा उठाव का काम गुमला वेस्ट मैनेजमेंट एजेंसी द्वारा किया जाता है. शहर में करीब 25 स्थानों पर बड़े कंटेनर वाले कूड़ेदान भी लगाये गये हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग कचरा कूड़ेदान में डालते हैं, लेकिन अधिकांश लोग कूड़ेदान के बाहर ही कचरा फेंक देते हैं. ऐसे में शहरवासियों को भी अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है. यदि कचरा कूड़ेदान में डाला जाये, तो सड़कें और गलियां साफ रह सकती हैं तथा कूड़ेदान में जमा कचरे का समय पर उठाव भी संभव हो सकेगा.
