गुमला. उरांव सांस्कृतिक समाज ओडिशा के तत्वावधान में रविवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित आदिवासी एग्जीबिशन ग्राउंड में करम पूर्व संध्या महोत्सव का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव एवं ओडिशा सरकार के एसटी-एससी मंत्री नित्यानंद गोंड सहित पूर्व विधायक मांडर गंगोत्री कुजूर, मणिलाल केरकेट्टा, मांगे एक्का, मिर्धा टोप्पो समेत कई लोग शामिल हुए.
विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्तिक उरांव महाविद्यालय गुमला के सहायक प्राध्यापक डॉ तेतरू उरांव ने करम पर्व की सांस्कृतिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि कांसी फूल का खिलना करम देव के आगमन का संकेत माना जाता है. करम पर्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं, बल्कि माता-पिता और पूरे समाज के सामूहिक जुड़ाव का पर्व है. करम कथा अच्छे कर्म करने, प्रकृति से जुड़ने तथा आपसी गिले-शिकवे भुलाकर मिल-जुलकर रहने की सीख देती है.
उन्होंने करम डाली, जवां, खीरा और अन्य अनुष्ठानों के सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी. रांची के डॉ नारायण उरांव ‘सैंदा’ ने तोलोंग लिपि के उद्भव और विकास यात्रा, जबकि डॉ शांति खलखो ने उरांव समुदाय के इतिहास और पूर्वजों की यात्रा पर जानकारी साझा की.
आयोजन समिति की अध्यक्ष सुकेशी उरांव ने अतिथियों का स्वागत किया. इस दौरान कुड़ुख भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव को ज्ञापन सौंपा गया.
