गुमला. गुमला के पालकोट रोड स्थित सरना सम्मेलन मैदान में सरना प्रार्थना सभा के बैनर तले करम पूर्व संध्या कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और करम पर्व के महत्व पर वक्ताओं ने विचार रखे. मुख्य अतिथि मंत्री चमरा लिंडा की पत्नी ललिता लिंडा शामिल हुईं. उनके साथ विधायक प्रतिनिधि सुनील उरांव, मोहरलाल उरांव और जितिया उरांव मौजूद थे.
ललिता लिंडा ने कहा कि करम पर्व आदिवासी समाज की प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक एकता से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है. करम देवता की पूजा के माध्यम से समाज प्रकृति के प्रति अपनी आस्था और संरक्षण का संदेश देता है. उन्होंने कहा कि नयी पीढ़ी को अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ना समाज की जिम्मेदारी है. आधुनिकता के दौर में भी अपनी भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज और पर्व-त्योहारों को बचाये रखना जरूरी है. उन्होंने सभी को करम पर्व की शुभकामनाएं देते हुए समाज में आपसी भाईचारा और एकता बनाये रखने का आह्वान किया.
सरना प्रार्थना सभा के जिला अध्यक्ष छोट्या उरांव ने कहा कि करम पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है. संचालनकर्ता आह्लाद उरांव ने कहा कि करम पर्व हमारी पहचान, आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक है. आज के समय में आधुनिकता के कारण पारंपरिक संस्कृति प्रभावित हो रही है.
मौके पर आदिवासी छात्र संघ के सुशील मिंज, जतरु उरांव, सरना प्रार्थना सभा के प्रवक्ता जितिया उरांव, उपाध्यक्ष राकेश उरांव, सचिव शत्रुध्न बड़ाइक सहित अमृता देवी, अनु तिर्की कुमारी, अंजली कुमारी, मालती उरांव, जानकी उरांव, सोमारी उरांव, जोली उरांव और सावित्री उरांव समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे.
