बरसात में बेहाल गुमला नगर परिषद, सड़क पर बह रहा नाली का पानी

गुमला नगर परिषद के वार्डों में जलजमाव, टूटी सड़कें और गंदगी से लोग बेहाल हैं. जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण शहर की जनता नारकीय जीवन जीने को मजबूर है.

गुमला: यह गुमला नगर परिषद की कहानी है, जहां बरसात में शहर की व्यवस्था पूरी तरह बदहाल नजर आ रही है. जनता अपने हाल पर जीने को मजबूर है. नगर परिषद के पदाधिकारी कार्यालय से बाहर निकलकर शहर की स्थिति देखने नहीं आते. वहीं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षद चुनाव जीतने के बाद सिर्फ नाली साफ कराने में लगे हैं. टूटी सड़कों की ओर किसी का ध्यान नहीं है.

शहर के कई इलाकों में नाली का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है. बदबू से लोग परेशान हैं. अधिकांश मुहल्लों में नालियों के किनारे घास-फूस उग आये हैं, जिससे लोगों को सांप और बिच्छू का डर बना रहता है. सड़कों पर जलजमाव की स्थिति है. लोग जलजमाव और गंदे पानी के बीच आने-जाने को मजबूर हैं. गुमला शहर में कुल 22 वार्ड हैं. लेकिन बरसात के दिनों में कई वार्डों की स्थिति ऐसी हो गयी है कि लोगों को सड़क पर जमा पानी को तालाब और नदी मानकर ही गुजरना पड़ रहा है.

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अधिकारियों के क्वार्टर साफ, बाकी मुहल्ले बेहाल

सरकारी अधिकारियों के क्वार्टर के आसपास और वहां की सड़कें साफ-सुथरी नजर आती हैं. लेकिन शहर के बाकी मुहल्लों का हाल बेहाल है. कहीं सड़क पर कीचड़ है, तो कहीं नाली का पानी बह रहा है. टूटी सड़कों पर गाड़ियां फंस रही हैं और लोगों को परेशानी हो रही है. करीब 15 दिन पहले जिन सड़कों की नगर परिषद ने मौखिक रूप से मरम्मत करायी थी, वे सड़कें अब फिर टूट गयी हैं. इससे सरकारी राशि के खर्च पर भी सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि टूटी सड़कों की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च किये गये, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है.

यहां बता दें कि करीब सात माह पहले नगर परिषद का चुनाव हुआ था. लोगों ने सोच-विचार कर ईमानदार और काम करने वाले प्रतिनिधियों को चुना था. लेकिन सात माह में ही चुनाव जीतकर आये प्रतिनिधियों के कामकाज का तरीका लोगों के सामने आ गया है.

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दो महीने आपसी कलह में उलझे रहे प्रतिनिधि

नगर परिषद के प्रतिनिधि करीब दो महीने तक आपसी कलह में ही उलझे रहे. मामला सुलझने के बाद भी अब प्रतिनिधि जनता के बीच नजर नहीं आ रहे हैं. दूसरी ओर, शहर की जनता सफाई, टूटी सड़क, नाली, जलजमाव और कीचड़ जैसी समस्याओं से जूझ रही है.

लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि जनता से वसूले गये राजस्व के पैसे से प्रतिनिधियों के घरों के सामने उनके नाम के बोर्ड लगाये गये हैं. इसे लेकर प्रतिनिधियों पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं शहर की मूल समस्याओं पर अब तक अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है.

जनता को इंतजार, कब जागेंगे पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि

बरसात के इस मौसम में शहर के लोग सफाई, टूटी सड़क, नाली, जलजमाव और कीचड़ की समस्या से परेशान हैं. लोगों को उम्मीद है कि नगर परिषद के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि जल्द शहर की समस्याओं की ओर ध्यान देंगे. अब देखना है कि नगर परिषद के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि कब जागते हैं और कब शहर की जनता को इन समस्याओं से राहत मिलती है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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