इंडोर स्टेडियम में धूमधाम से मना जिला स्थापना दिवस

गुमला जिला स्थापना की 42वीं वर्षगांठ पर रविवार को गुमला में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया.

प्रतिनिधि, गुमला गुमला जिला स्थापना की 42वीं वर्षगांठ पर रविवार को गुमला में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन इंडोर स्टेडियम गुमला में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ. उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, पुलिस अधीक्षक शंभु कुमार सिंह, उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो सहित अन्य अधिकारियों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. इसके बाद शहीद तेलंगा खड़िया की प्रतिमा, अलबर्ट एक्का स्टेडियम में परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की प्रतिमा व बिरसा मुंडा एग्रो पार्क में बिरसा मुंडा की प्रतिमा सहित गुमला शहर के सभी शहीद स्मारकों पर पुष्पांजलि अर्पित किया गया. पुष्पांजलि कार्यक्रम के बाद समाहरणालय सभागार चंडाली में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जहां गुमला रिवाइंड नामक भव्य फोटो गैलेरी का उद्घाटन किया गया, जिसमें गुमला के इतिहास, विभिन्न प्रशासनिक घटनाओं, विशिष्ट आगंतुकों की यात्राओं व सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें प्रदर्शित की गयी. मुख्य अतिथि गुमला से सेवानिवृत्त उपायुक्त गौरी शंकर मिंज ने अपने संबोधन में वर्ष 2014-15 के कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उस समय गुमला गंभीर उग्रवाद की चपेट में था. उन्होंने कहा कि मैंने बिना सुरक्षा बल के बिशुनपुर प्रखंड के घोर उग्रवाद प्रभावित बनालात गांव में मोटरसाइकिल से जाकर जनता दरबार आयोजित किया था. उस समय उग्रवादियों ने मुझे चारों ओर से घेर लिया था. लेकिन विश्वास, संवाद व संयम के साथ हम वहां से सुरक्षित लौटे. उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर था. जब ग्रामीणों के बीच सरकार प्रत्यक्ष पहुंची थी और वहीं से विकास का बीज बोया गया. पूर्व पुलिस अधीक्षक उपेंद्र कुमार ने अपने वक्तव्य में गुमला के कठिन दौर को रेखांकित करते हुए बताया कि जब मैंने कार्यभार संभाला था. तब गुमला और इसके ग्रामीण इलाकों में जाने से भी लोग डरते थे. लेकिन टाना भगतों के अहिंसक आंदोलन, जनता के सहयोग व पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी से हम शांति बहाल कर पाये. गुमला सिर्फ उग्रवाद नहीं, बल्कि साहित्य, विज्ञान व खेल के लिए भी जाना जाता है. पूर्व उपविकास आयुक्त पुनाई उरांव ने गुमला समाहरणालय भवन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह भवन एक अद्वितीय प्रशासनिक ढांचा है. जहां जिले के लगभग सभी विभाग एक छत के नीचे कार्यरत है. पूर्व कार्यालय अधीक्षक मार्शल होरो ने भावुकता के साथ अपने अनुभव साझा किये. उन्होंने कहा कि मैंने 39 वर्षों तक गुमला की सेवा की. कई स्थानों पर अवसर मिलने के बावजूद अपने जिले के लिए यहीं रहा. इस आयोजन से कई भूली-बिसरी स्मृतियां जीवंत हो उठीं. इस कार्यक्रम ने हमें हमारी जड़ों से फिर से जोड़ा है. पूर्व अंतरराष्ट्रीय एथलीट महावीर राम लोहारा ने खेल के प्रति अपने जुड़ाव की कहानी साझा किया. कहा कि जब मैं आठवीं कक्षा में था. तब अखिल भारतीय प्रतियोगिता में भाग लेने का सपना देखा. बाद में मैंने लॉन्ग जंप, हॉकी व अन्य खेलों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर गुमला का नाम रोशन किया. आज के बच्चों को जो संसाधन व प्रशिक्षण मिल रहा है. उससे आने वाले समय में गुमला निश्चित ही स्पोर्ट्स मैप में और ऊपर जायेगा. वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार पांडेय ने गुमला के गठन से पूर्व के दौर और जिले की साहित्यिक, सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी साझा किया. वहीं कार्यक्रम के बीच पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह हुआ. जिसमें गुमला के ऐतिहासिक दस्तावेजों, उपलब्धियों, जनसांख्यिकी आंकड़ों व सांस्कृतिक पक्षों पर आधारित एक सुंदर पुस्तक का विमोचन किया गया. साथ ही जिले के 12 उत्कृष्ट शिक्षकों एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिला का नाम रोशन करने वाले 14 खिलाड़ियों को अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया. इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो ने किया. उन्होंने कहा कि गुमला जिला 1983 में लोहरदगा से अलग होकर अस्तित्व में आया. यह जिला कभी सर्वाधिक शांत माना जाता था. फिर समय के साथ अनेक चुनौतियां आयी. लेकिन प्रशासन, पुलिस एवं नागरिकों के सामूहिक प्रयास से आज गुमला पुनः विकास, खेल और पर्यटन के मानचित्र पर उभर रहा है. कार्यक्रम में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, पुलिस अधीक्षक शंभु कुमार सिंह, परियोजना निदेशक आइटीडीए रीना हांसदा, अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक, एसडीओ चैनपुर पूर्णिमा कुमारी, एसडीओ बसिया जयवंती देवगम, नजारत उप समाहर्ता ललन कुमार रजक, जिला योजना पदाधिकारी रमण कुमार, जिला खेल पदाधिकारी मनोज कुमार, डीएसओ प्रीति किस्कू, सीओ हरीश कुमार, सहित अन्य मौजूद थे.

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Author: DEEPAK

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