गुमला. राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत जिला उद्यान कार्यालय गुमला द्वारा बांस की औद्योगिक खेती विषय पर आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन रविवार को हुआ. उद्यान निदेशालय द्वारा नामित रांची के छोटानागपुर क्राफ्ट डेवलपमेंट सोसायटी के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न प्रखंडों के 14 किसान और एक क्षेत्रीय कार्यकर्ता शामिल हुए.
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बांस के महत्व, इसे लगाने की विधि, इसके विभिन्न उपयोग और आय वृद्धि में इसकी भूमिका से अवगत कराया गया. संस्था के प्रशिक्षक कीर्तिमान नाथ, अंजीत उरांव, सुकरा उरांव आदि ने बांस से संबंधित विभिन्न जानकारी साझा की. साथ ही किसानों को आय वृद्धि और भविष्य में वैश्विक बाजार में बांस की मांग की संभावनाओं से अवगत कराया गया.
प्रशिक्षण के अंतिम दिन सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये. जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ तमन्ना परवीन ने प्रमाण पत्र प्रदान किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बांस मिशन के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में गुमला जिले में 24 हेक्टेयर निजी भूमि और आठ हेक्टेयर सरकारी भूमि पर बांस की औद्योगिक खेती का लक्ष्य है. योजना के तहत किसानों को उन्नत नस्ल के बहुउपयोगी बांस लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि बांस को लकड़ी और फाइबर (प्लास्टिक) के विकल्प के रूप में लिया जा रहा है. इसे घास की एक प्रजाति के साथ ही हरित सोना भी माना जाता है और यह पर्यावरण अनुकूल है. आज के समय में प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग से विश्व जूझ रहा है. वहीं, बांस हरियाली के साथ कार्बन क्रेडिट से कमाई का एक जरिया बन रहा है. डॉ तमन्ना परवीन ने किसानों को बांस की औद्योगिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया.
