हादसे को आमंत्रित करता लोंगा पुल

बिशुनपुर में तीन करोड़ के पुल का पिलर धंसा 2010 में बरसात मेंं पिलर बैठ गया है. पुल नहीं बना, तो कभी भी हो सकता है हादसा दुर्जय पासवान गुमला : बिशुनपुर प्रखंड मुख्यालय से करीब 10 किमी दूरी पर लोंगा नदी है. यहां वर्ष 2010 में तीन करोड़ रुपये से पुल बना था. विशेष […]

बिशुनपुर में तीन करोड़ के पुल का पिलर धंसा
2010 में बरसात मेंं पिलर बैठ गया है.
पुल नहीं बना, तो कभी भी हो सकता है हादसा
दुर्जय पासवान
गुमला : बिशुनपुर प्रखंड मुख्यालय से करीब 10 किमी दूरी पर लोंगा नदी है. यहां वर्ष 2010 में तीन करोड़ रुपये से पुल बना था. विशेष प्रमंडल गुमला ने पुल बनवाया था. पुल का पिलर नदी में धंस गया है, जिससे एक पिलर टेढ़ा हो गया है.
अाशंका जतायी जा रही है कि पुल पर ज्यादा भार पड़ा या नदी में तेज बहाव आया, तो कभी भी पुल ध्वस्त हो सकता है. पुल का यह हाल वर्ष 2010 में आयी बाढ़ से हुआ है. पिलर धंसे करीब छह साल हो गये, लेकिन अभी तक इसकी मरम्मत नहीं की गयी है. इस पुल को बनाने का निर्देश ठेकेदार को दिया गया था, परंतु दोबारा ठेकेदार पुल नहीं बनवा सका. नतीजा पुल से गुजरते वक्त गाड़ी से उतर कर पार करना पड़ता है. गांव के लोग जान हथेली पर रख कर टेढ़े पुल के ऊपर से सफर करते हैं.
नक्सल अभियान में परेशानी है
पुल टेढ़ा होने के कारण पुलिस को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है, क्योंकि इसी नदी से होकर देवरागानी, तेंदार, दीरगांव, लुपुंगपाट व विमरला सहित कई गांव में आना-जाना होता है. ये सभी गांव घोर नक्सल हैं. नक्सली इन इलाकों को सेफ जोन बना कर रहते हैं. पुल के अभाव में पुलिस को आने-जाने में परेशानी होती है. ग्रामीण भी परेशान हैं.
पुल बन जाये, तो फायदे होंगे
अगर पुल बन जाये, तो इस क्षेत्र में वाहनों का आवागमन आसानी से हो सकेगा. करीब छह हजार की आबादी को फायदा होगा. ज्ञात हो कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के कारण इस क्षेत्र की सभी छोटी नदियों में पुल निर्माण अधूरा है. बिशुनपुर से तेंदार तक सड़क भी नहीं बन रही है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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