ओके:::एल:: फोटो- ब्रह्मांड की रक्षा के लिए की जाती सरहुल पूजा

ओके:::एल:: फोटो- ब्रह्मांड की रक्षा के लिए की जाती सरहुल पूजासरहुल पर दो दिवसीय कार्यक्रम शुरूफोटो- एलडीजीए-8 नृत्य प्रस्तुत करते खोड़हा, एलडीजीए-9 झांकी में शामिल बच्चे, एलडीजीए-10 मंचासीन अतिथि. सेन्हा-लोहरदगा़ राजी पड़हा प्रार्थना सभा सेन्हा द्वारा सरना मैदान में प्रकृति पर्व सरहुल पूर्व संध्या समारोह का दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया. समारोह के […]

ओके:::एल:: फोटो- ब्रह्मांड की रक्षा के लिए की जाती सरहुल पूजासरहुल पर दो दिवसीय कार्यक्रम शुरूफोटो- एलडीजीए-8 नृत्य प्रस्तुत करते खोड़हा, एलडीजीए-9 झांकी में शामिल बच्चे, एलडीजीए-10 मंचासीन अतिथि. सेन्हा-लोहरदगा़ राजी पड़हा प्रार्थना सभा सेन्हा द्वारा सरना मैदान में प्रकृति पर्व सरहुल पूर्व संध्या समारोह का दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया. समारोह के पहले दिन प्रखंड क्षेत्र के 81 खोड़हा शामिल हुए. सभी ने बारी बारी से अपने समूह के साथ खोड़हा नाच का प्रदर्शन किया. कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा. मौके पर अर्रू सरहुल पूजा समिति द्वारा आकर्षक झांकी निकाली गयी. पाहन पुजार ने समारोह की शुरुआत की़ मौके पर प्रार्थना सभा के प्रदेश कोषाध्यक्ष राधा तिर्की ने कहा कि संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा के लिए सरहुल पूजा की जाती है़ उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में चैत माह के शुक्ल प्रतिपदा को नया साल माना गया है. यह महीना आदिवासियों के लिए तपस्या का मास माना जाता है. जब तक सरहुल नहीं बीत जाता, आदिवासी समुदाय नये फल-फूल या पत्ते का सेवन नहीं करते . समारोह में शीला उरांव, केश्व, अनिल, सुमित्रा, कैलाश, गंगा, सुमित्रा, सुशमा, फुलदेव, रामचंद्र,लीलावती, मंदीपा, जयपाल, चंद्रदेव, सोमे, मंगेश्वर, गीता, पुष्पा, रजनीश व देवकी आदि शामिल थे.

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