25 गुम 22 में माल्यार्पण करते अतिथि.गुमला. प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में गुरुवार को संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की 50वीं पुण्यतिथि मनायी गयी. केंद्र की संचालिका बहन शांति ने मातेश्वरी के चित्र पर पुष्पार्चन कर कार्यक्रम का उदघाटन किया. बहन शांति ने कहा कि मातेश्वरी दिव्य शक्ति की प्रतिमूर्ति थी. प्रतिभा व महान व्यक्तित्व की धनी मातेश्वरी का मूलनाम राधे था. 18 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने अपना जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया. अपनी व्यवहार कुशलता व अलौकिक वात्सल्य से सभी को मातृपालन का अनुभव कराया. तब से उन्हें मातेश्वरी के नाम से पुकारा जाने लगा. मातेश्वरी सदा योगनिष्ठ शक्ति स्वरूपा थी. संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा के साथ उन्होंने यज्ञ माता दायित्व निभाया. उनका ज्ञान व योग बल सभी ब्रह्मा वत्सों के लिए प्रेरणास्रोत है. मौके पर बहन रेखा, बबीता, सुनीता, रेणु, आशा, अंजीता, सरोज, शीलू, सुधीर, विनय, सहदेव महतो, संजय अग्रवाल, केदार प्रसाद, रघु भगत, पवन अग्रवाल सहित कई लोग उपस्थित थे.
:6:::: मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की पुण्यतिथि मनी
25 गुम 22 में माल्यार्पण करते अतिथि.गुमला. प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में गुरुवार को संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की 50वीं पुण्यतिथि मनायी गयी. केंद्र की संचालिका बहन शांति ने मातेश्वरी के चित्र पर पुष्पार्चन कर कार्यक्रम का उदघाटन किया. बहन शांति ने कहा कि मातेश्वरी दिव्य शक्ति की प्रतिमूर्ति थी. प्रतिभा […]
