पीआइओ व एपीआइओ नामित करने में धांधली

गुमला : जिले के वन विभाग में मनमाने ढंग से पीआइओ (जन सूचना पदाधिकारी) व एपीआइओ (सहायक जन सूचना पदाधिकारी) बनाये जाने का मामला सामने आया है. ज्ञात हो कि पीआइओ व एपीआइओ विभाग के किसी सक्षम पदाधिकारी को बनाया जाना है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के (पत्रांक 3047/अनु. दिनांक छह सितंबर 2005) […]

गुमला : जिले के वन विभाग में मनमाने ढंग से पीआइओ (जन सूचना पदाधिकारी) व एपीआइओ (सहायक जन सूचना पदाधिकारी) बनाये जाने का मामला सामने आया है. ज्ञात हो कि पीआइओ व एपीआइओ विभाग के किसी सक्षम पदाधिकारी को बनाया जाना है.

कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के (पत्रांक 3047/अनु. दिनांक छह सितंबर 2005) अनुसार किसी सक्षम पदाधिकारी को ही पीआइओ व एपीआइओ नामित करने का निर्देश है, लेकिन वन प्रमंडल गुमला के वन संरक्षक द्वारा मनमाने ढंग से विभाग के प्रधान लिपिक सहदेव तिर्की को पीआइओ व निम्न वर्गीय लिपिक नीतीश कुमार सिंह को एपीआइओ बना दिया है.

इससे पूर्व विभाग के सहायक वन संरक्षक मंगल कच्छप पीआइओ थे. लेकिन 31 मार्च 2017 को मंगल कच्छप के सेवानिवृत्त होने के बाद वन प्रमंडल गुमला के वन संरक्षक द्वारा अपने कार्यालय अधिसूचना संख्या 70, दिनांक 19 अप्रैल 2017 के तहत कार्यालय में कार्यरत प्रधान लिपिक सहदेव तिर्की को पीआइओ के रूप में नामित कर दिया गया.


इसका खुलासा तब हुआ, जब गुमला के आरटीआइ डिस्टिक रिसोर्स पर्सन आनंद किशोर पंडा ने आरटीआइ का सहारा लेते हुए विभाग से इसकी जानकारी मांगी. इस संबंध में मुख्य सूचना आयोग के निर्देश पर झारखंड राज्य सूचना आयोग के सचिव ने वन प्रमंडल गुमला के वन संरक्षक को पत्र भेज कर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के पत्रांक 3070 दिनांक छह सितंबर 2005 के अनुरूप विभाग के ही किसी सक्षम पदाधिकारी को पीआइओ व एपीआइओ नामित करने का निर्देश दिया है.

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