गुमलाः जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत बरवेनगर गांव निवासी प्रवासी ट्रक चालक जमालुद्दीन सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद मुंबई के एक निजी अस्पताल में इलाजरत हैं. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के नाम पर 10 लाख रुपए से अधिक का बिल बनाने और कंपनी के साथ मिलीभगत कर आर्थिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले की जानकारी मिलने के बाद मजदूर संघ सीएफटीयूआई ने हस्तक्षेप करते हुए मामले की जांच और घायल मजदूर को सुरक्षित घर वापस लाने की पहल शुरू की है.
स्टील रोल की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल
जानकारी के अनुसार, जमालुद्दीन पिछले कई वर्षों से ट्रक चालक के रूप में काम कर रहे हैं. करीब 15 वर्ष पूर्व हिना परवीन से विवाह के बाद वह अपनी ससुराल बरवेनगर में ही रह रहे हैं. वह सुरेंद्र प्रताप सिंह का ट्रक चलाते हैं. परिजनों के मुताबिक, सात अगस्त 2026 को सुबह करीब 11 से 11:30 बजे जमालुद्दीन महाराष्ट्र के तलोजा स्थित गीता स्टील प्लांट में माल लोड कराने पहुंचे थे. सामान लोड होने के बाद तिरपाल लगाने के दौरान अचानक चक्कर आने से वह गिर गए. इसी दौरान स्टील के बड़े रोल की चपेट में आने से उनका एक हाथ और एक पैर गंभीर रूप से कट गया.
कंपनी के कर्मचारियों पर भी लगाया लापरवाही का आरोप
हादसे के बाद कंपनी के कर्मचारियों ने जमालुद्दीन को मुंबई के व्हाइट लोटस इंटरनेशनल रिसर्च सेंटर अस्पताल में भर्ती कराया. परिजनों का आरोप है कि इसके बाद कंपनी के कर्मचारी अस्पताल से चले गए और घायल मजदूर की सुध लेने कोई अधिकारी या वाहन मालिक नहीं पहुंचा. इलाज के खर्च को लेकर भी परिवार पर लगातार आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है.
पत्नी ने मजदूर संघ से मांगी मदद
घटना की जानकारी मिलने पर जमालुद्दीन की पत्नी हिना परवीन ने सीएफटीयूआई के झारखंड प्रदेश उपाध्यक्ष जुम्मन खान से संपर्क किया. जुम्मन खान ने गुमला के श्रम अधीक्षक से फोन पर बात कर सहयोग मांगा है. संघ की ओर से कंपनी और वाहन मालिक से भी संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है. जुम्मन खान ने कहा कि संगठन की प्राथमिकता घायल मजदूर को सुरक्षित घर वापस लाना है. जमालुद्दीन गरीब परिवार से हैं और उनके तीन छोटे बच्चे हैं. ऐसे में 10 लाख रुपए से अधिक का अस्पताल बिल परिवार के लिए गंभीर आर्थिक संकट बन गया है. संघ ने मामले की जांच कर घायल मजदूर और उसके परिवार को आवश्यक सहायता दिलाने की पहल शुरू की है.
