राजमहल कोल परियोजना के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचकर इसीएल के तकनीकी निदेशक नीलाद्री राय ने परियोजना में बन रहे नवनिर्मित सीएचपी का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि वार्षिक 10 एमटी क्षमता वाले सीएचपी का निर्माण हो रहा है. इससे कोयला डिस्पैच में अत्यधिक सुविधा होगी. उन्होंने संवेदक को निर्देश दिया कि समय के अनुसार गुणवत्तापूर्ण कार्य करें. निर्माण में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. तकनीकी निदेशक ने परियोजना के तालझारी खनन क्षेत्र, बसडीहा खनन क्षेत्र, लौहंडिया खनन क्षेत्र, बीएलएस साइड का निरीक्षण किया व सुरक्षा को ध्यान में रखकर कोयला उत्पादन का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कोयला खनन के साथ-साथ सुरक्षा भी अति आवश्यक है. खनन एवं सुरक्षा दोनों एक ही सिक्के पहलू हैं. खनन क्षेत्र में प्रवेश करने से पूर्व सुरक्षा के सभी नियम पालन करना आवश्यक है और सुरक्षा के सभी सामग्री पहन कर खनन क्षेत्र में प्रवेश करें. शराब पीकर खनन क्षेत्र में प्रवेश नहीं करें. परियोजना के अधीनस्थ कार्यरत हुर्रासी कोयला खनन क्षेत्र का भी निरीक्षण किया तथा परियोजना के विस्तार को लेकर समीक्षा की. उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष समापन की ओर जा रहा है राजमहल परियोजना एवं हुर्रासी परियोजना को कोयला उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करना है. इस लक्ष्य को सुरक्षित तरीके से प्राप्त करें. उन्होंने कहा कि पिछला वित्तीय वर्ष में हुर्रासी परियोजना बेहतर प्रदर्शन कर अपना लक्ष्य को प्राप्त किया था उम्मीद है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी बेहतर प्रदर्शन करेगा. तकनीकी निदेशक ने राजमहल हाउस में परियोजना एवं प्राइवेट कंपनी के वरीय पदाधिकारी से बैठक कर विभाग वार समीक्षा किया और पुनर्वास स्थल पर बेहतर सुविधा प्रदान कर लोगों को पुनर्वास करने पर जोर दिया. परियोजना के बिस्तार पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए परियोजना का विस्तार होना आवश्यक है. महाप्रबंधक प्रभारी एएन नायक ने तकनीकी निदेशक को गुलदस्ता देकर सम्मानित किया. मौके पर महाप्रबंधक संचालन दिनेश शर्मा, प्रोजेक्ट ऑफिसर सतीश मुरारी, संजय कुमार सिंह, सत्यनारायण महापात्रा, एसके सुरक्षित ,संजीव कुमार आदि उपस्थित थे.
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