पथरगामा के परसपानी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आदिवासी कुड़मी समाज के जिला कमेटी गोड्डा की ओर से रविवार को बैठक आयोजित की गयी. यह बैठक 10 और 11 अक्तूबर को रांची के विधायक क्लब हॉल में आयोजित होने वाले दो दिवसीय केंद्रीय महाधिवेशन की सफलता को लेकर की गयी थी. बैठक में आकुस के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित थे, जिन्होंने बारी-बारी से अपने विचार व्यक्त किये. आकुस के जिलाध्यक्ष विनोद बंसुआर ने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी को एकजुट होकर भाग लेना होगा. उन्होंने आगामी जनगणना 2025-26 में लोगों को जाति कॉलम में जनजाति कुड़मी, भाषा कॉलम में मातृभाषा कुड़माली तथा धर्म कॉलम में प्रकृति पूजक सरना दर्ज कराने की अपील की. उनका कहना था कि जनगणना में सही दर्जीकरण ही कुड़मी जनजाति को अधिकार दिलाने की कुंजी है. बंगाल प्रभारी उमेश कुमार महतो बंसुआर ने कहा कि कुड़मी समुदाय सदा आदिवासी रहेगा. संगठन सचिव दिलीप महतो ने कहा कि जो मांग वे सरकार से कर रहे हैं, वही उनके आने वाले पीढ़ी भी सौ वर्षों बाद मांगती रहेगी. कोषाध्यक्ष धरनीधर महतो ने चेतावनी दिया कि यदि सरकार अपनी भूल नहीं सुधारेगी तो कुड़मी समुदाय उग्र आंदोलन करने को मजबूर हो जाएगा. जिला कमेटी सदस्य ध्रुव महतो ने कहा कि कुड़मी समाज के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. महिला मोर्चा की सदस्यता पानवती महताईंन ने बारह मासें तेरह परब की जानकारी साझा की. सदस्य पंकज महतो ने कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने पर जोर दिया. पूर्व उपाध्यक्ष जयप्रकाश बंसरिआर ने बताया कि कुड़मी जनजाति में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कार कुड़माली नेग, नेगाचारि, नियम, सत्य और धरम सारना मत के अनुसार किए जाते हैं. बैठक में फूलचंद महतो, कपिल महतो, कमल किशोर महतो, उत्तम महतो, प्रेमलाल महतो, प्रवीण महतो, सुशीला महताइन, कलावती महताइन, किरण महताइन, कमली महताइन, चांदनी महतो, कजरी महतो, फुलो महताइन, विनीता महतो, जुली कुमारी, जयराम महतो, हरिओम महतो, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष मानगरि दयालता महतो और सचिव मानगरि चंचला महतो सहित कई समुदायजन उपस्थित थे. इस बैठक से स्पष्ट हुआ कि कुड़मी आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की सुरक्षा के लिए संगठित होकर आगे बढ़ रहा है.
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