दूसरी कंपनियों की तरह अदाणी पावर प्लांट बंद कराने में जुटे कुछ लोग: सांसद

डॉ निशिकांत दुबे पहुंचे गोड्डा, प्लांट के धरना-प्रदर्शन पर उठाये सवाल, कहा, जिंदल व ला-ओपाला फैक्टरी बंद होने से हजारों हुए बेरोजगार

गोड्डा. अदाणी पावर प्लांट में पिछले कुछ दिनों से चल रहे मजदूरों के धरना और हड़ताल को लेकर गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने गोड्डा पहुंचकर वार्ता की. अपने घर कहलगांव में रामनवमी के पूजन कार्यक्रम में जाने के क्रम में श्री दुबे ने मीडिया से बातचीत करते हुए बड़ा बयान दिया. डॉ. दुबे ने मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि जिस तरह इस क्षेत्र में पहले जिंदल और मधुपुर में ला-ओपाला फैक्टरी को राजनीतिक कारणों से बंद कराने का प्रयास किया गया, ठीक उसी तरह अब अदाणी पावर प्लांट को बंद करने की साजिश की जा रही है. अदाणी के आने से गोड्डा का विकास हुआ है और हजारों लोगों को रोजगार मिला है, लेकिन अब इस प्रकार की गतिविधियों से लोगों का रोजगार छिनने का खतरा है. श्री दुबे ने इस मुद्दे को “रगड़ा ” की संज्ञा देते हुए कहा कि पूरे देश में इनोव कंपनी को उसके गलत कार्यों के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है. ऐसे में यदि इनोव कंपनी से मजदूरों को हटाकर किसी दूसरी कंपनी में समायोजित किया जा रहा है और उन्हें बेहतर वेतन तथा सुविधाएं दी जा रही हैं, तो इसमें मजदूरों का क्या नुकसान है. कुछ लोग मजदूरों को भड़का कर प्लांट बंद कराने की तैयारी में हैं. उन्होंने बताया कि अदाणी कंपनी स्थानीय संसाधनों का उपयोग नहीं करती, कोयला और पानी बाहर से लाया जाता है. स्थानीय रैयतों को नौकरी भी दी गयी है. जिला प्रशासन से लेकर नेताओं तक को मिला है सीएसआर फंड का लाभ डॉ. दुबे ने बताया कि उन्होंने डीसी से प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी लेने को कहा है. इसमें यह पता करने को कहा गया है कि अदाणी में कितने स्थानीय रैयत काम कर रहे हैं और कितने बाहर के लोग. उन्होंने कहा कि अदाणी के संचालन से सभी का कल्याण हुआ है. अदाणी न केवल जिला प्रशासन को वाहन, तेल आदि उपलब्ध कराती है, बल्कि नेताओं के लिए भी सीएसआर फंड से खर्च किया गया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं कभी कंपनी से कोई लाभ नहीं लिया, इसी कारण वह दृढ़ता से अपनी बात रखते हैं. नेताओं के परिजनों को मिला रोजगार, जांच की मांग डॉ. दुबे ने आरोप लगाया कि यहां के नेता और जिला अध्यक्ष की पत्नी, साला आदि पे-रोल पर कार्यरत हैं. उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की है. साथ ही यह भी कहा कि उन्होंने कंपनी से उन पदाधिकारियों की सूची मांगी है जिन्होंने निजी लाभ लिया है. उन्होंने कहा कि केवल आंदोलन करने से किसी का भला नहीं होगा. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने यहां के लोगों को नौकरी दिलाई है, लेकिन अपने किसी करीबी को कोई काम नहीं दिलवाया है. मजदूरों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन को समाप्त करें और नेतागिरी बंद करें ताकि सभी की भलाई हो सके. —

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By SANJEET KUMAR

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