प्रतिनिधि, गोड्डा : केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 'खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026' के विरोध में झामुमो ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है. गोड्डा सदर प्रखंड कार्यालय के समक्ष आयोजित विरोध सभा की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष यूसुफ अंसारी ने की. इस दौरान अतिथि के तौर पर जिला अध्यक्ष प्रेमनंदन मंडल ने केंद्र सरकार पर झारखंड के अधिकारों को छीनने और राज्य को आर्थिक रूप से पंगु बनाने का आरोप लगाया.
'धूल और प्रदूषण खाएं हम, टैक्स वसूले केंद्र'
सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष ने कहा कि ललमटिया जैसी एशिया की सबसे बड़ी खदानों से कोयला निकाला जाता है, जिससे देश के विभिन्न राज्यों हरियाणा, पंजाब, बिहार और यूपी के अलावा बांग्लादेश तक बिजली पहुंचती है. स्थानीय लोग कोयले के धुएं और प्रदूषण के कारण गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं तथा उनकी औसत आयु घट रही है. इसके बावजूद केंद्र सरकार नए कानून के जरिए राज्य सरकार से खनिज कर वसूलने का अधिकार छीनना चाहती है.
कल्याणकारी योजनाओं को बंद करने की साजिश का आरोप
झामुमो नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही 'मइया सम्मान योजना' (₹2,500 प्रतिमाह), '200 यूनिट मुफ्त बिजली', 'अबुआ आवास', 'सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना' और 'मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना' जैसी कल्याणकारी योजनाओं से भाजपा असहज है. केंद्र सरकार करों में कटौती कर राज्य के राजस्व को प्रभावित करना चाहती है, ताकि गरीबों और माताओं को मिलने वाली यह आर्थिक मदद बंद हो जाए.
'हम बरसाती मेंढक नहीं'
विपक्ष पर हमला बोलते हुए श्री मंडल ने कहा कि भाजपा चुनाव के वक्त आने वाले "बरसाती मेंढक" की तरह काम करती है, जबकि झामुमो हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ा है. पूर्ववर्ती भाजपा सरकार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान स्कूलों का विलय कर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को चौपट कर दिया गया था.
रांची और दिल्ली घेराव की चेतावनी
झामुमो ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने इस "काले कानून" को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन केवल प्रखंड स्तर तक सीमित नहीं रहेगा. आने वाले दिनों में रांची और दिल्ली का घेराव किया जाएगा. उग्र आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए नेताओं ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो गोड्डा समेत पूरे झारखंड की खदानों से कोयले की एक चक्की भी बाहर नहीं जाने दी जाएगी, जिससे न केवल देश के कई हिस्से बल्कि बांग्लादेश भी अंधेरे में डूब जाएगा.
