बसंतराय प्रखंड के जहाज कित्ता गांव में लगभग चार लाख रुपये की लागत से 14वें वित्त आयोग के तहत बने सोलर जलमीनार ग्रामीणों के लिए उम्मीद की किरण थे, लेकिन आज ये जलमीनार खुद बदहाली की मिसाल बन चुके हैं. करीब डेढ़ साल से खराब पड़े इन जलमीनारों के कारण गांव के चार हजार की आबादी को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सात सोलर जलमीनार लगाये गये थे, जिनमें से छह वर्षों से खराब पड़े हैं. विशेषकर आंगनबाड़ी केंद्र के पास स्थित जलमीनार की खराबी से बच्चों को पानी तक घर से लाना पड़ रहा है. स्थानीय ग्रामीणों अफसाना खातून, मेहरुन निशा, मो. हासीम, मो. शमशीर आदि ने आरोप लगाया कि जलमीनार के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ है. संवेदक और अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य किया, जिसके चलते जलमीनार कुछ ही दिनों में जवाब दे गये. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मुखिया और पंचायत सचिव की ओर से रिपेयरिंग के नाम पर लाखों रुपये की निकासी तो हुई, लेकिन कोई ठोस कार्य नहीं हुआ. शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला.
फंड के अभाव का हवाला, प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन
मुखिया सजमा बेगम ने कहा कि फंड के अभाव में मरम्मत नहीं हो सकी है. वहीं बीडीओ श्रीमान मरांडी ने कहा कि जलमीनारों की स्थिति की जांच कराकर शीघ्र मरम्मत करायी जाएगी. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि जलमीनारों की तकनीकी जांच करायी जाये और दोषी संवेदकों व अधिकारियों पर कार्रवाई हो, ताकि उन्हें शुद्ध पेयजल की सुविधा मिल सके और जन स्वास्थ्य की उपेक्षा न हो.क्या कहते हैं ग्रामीण-
गांव में पिछले डेढ़ वर्षों से पेयजल संकट गंभीर बना हुआ है. कई बार शिकायतें करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है.
-अफसाना खातून, ग्रामीण
गांव में पानी की समस्या इतनी विकराल है कि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं. आंगनबाड़ी व विद्यालय भी इससे अछूते नहीं हैं.-अजीजा खातून, ग्रामीण
छह महीने पहले मामले की जानकारी अधिकारियों को दी गयी थी, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई. नल जल योजना फेल हो गयी है.-मो. अशफाक, ग्रामीण
यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण प्रखंड कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे और अपनी आवाज उठाएंगे.-मो. जावेद, ग्रामीणB
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