लहठी गांव में सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को दी गयी विदाई

बंगाली परंपरा के उल्लासपूर्ण उत्सव में महिलाओं ने मां दुर्गा से मांगी सुख-समृद्धि की कामना

महागामा प्रखंड के लहठी गांव में दुर्गा पूजा के अंतिम दिन विसर्जन से पूर्व बंगाली समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन धूमधाम से किया. ढाक की थाप, शंखनाद और मंगल ध्वनियों के बीच विवाहित महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां दुर्गा से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना की. इस दौरान महिलाएं पारंपरिक लाल-सफेद साड़ी में सजी-धजी नजर आयीं. अर्पिता दास, सोमा देवी और सरस्वती देवी ने बताया कि सिंदूर खेला बंगाली संस्कृति की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और फिर आपस में एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर इस पर्व को आनंद के साथ विदाई का रूप देती हैं. सिंदूर खेला के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का शोभायात्रा के साथ विसर्जन किया गया. जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. पूरे मार्ग में भक्तों ने ढोल-नगाड़ों की ताल पर नृत्य करते हुए जय मां दुर्गा और आबार एशो मां (फिर से आना मां) के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया. पूरे गांव में श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. समिति के अध्यक्ष सुदीप कुमार दास ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी दुर्गा पूजा का समापन भक्तिभाव, परंपरा और सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ. उन्होंने सभी ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि अगले वर्ष मां का और अधिक उत्साह और भक्ति के साथ स्वागत किया जाएगा.

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By SANJEET KUMAR

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