लकड़मारा पंचायत के लकड़मारा दह के मेढ़ को ठेकेदार ने रातों-रात जेसीबी से काट दिया, जिससे क्षेत्र में कृत्रिम बाढ़ ने किसानों की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया. तीनों पंचायतों लकड़मारा, अमौर और डोय के कई गांवों में सैकड़ों एकड़ भूमि तालाब में तब्दील हो गयी. इससे गेहूं, मसूर, चना, सरसों, खेसाड़ी और अन्य रबी फसल बर्बाद हो गयी. महागामा एसडीओ आलोक वरण केसरी के निर्देश पर मेहरमा सीओ मदन महली की ओर से दो सदस्यीय टीम भेजी गयी. टीम में सीआइ लोकनाथ गोंड और अमीन विभाष शामिल थे. जांच रिपोर्ट में सीओ ने बताया कि ठेकेदार की मनमानी के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ है. हालांकि पूरी क्षति का आंकलन अभी नहीं हुआ है, लेकिन अनुमानित रूप से यह नुकसान लाखों रुपये में है. सीओ ने कहा कि क्षति के मुआवजे के लिए वरीय पदाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि ठेकेदार को लाभ दिलाने में संबंधित विभाग ने भी मदद की.
दो करोड़ 62 लाख रुपये की परियोजना में ठेकेदार को लाभ
लकड़मारा दह के जीर्णोद्धार का काम माइनर एरिगेशन विभाग के तहत लगभग दो करोड़ 62 लाख रुपये की लागत से होना है. यह कार्य रांची के ठेकेदार राजवर्धन कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा है. किसानों के अनुसार, पिछले वर्ष मानसून के कारण कार्य बंद हुआ था. शनिवार को ठेकेदार ने बिना किसी सूचना के बांध में जमा लगभग दस फीट पानी जेसीबी से काटकर बाहर निकाल दिया. पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही घंटों में सैकड़ों एकड़ फसल पूरी तरह डूब गयी. किसानों के आकलन के अनुसार तीनों पंचायतों में लगभग 500 बीघा जमीन में लगी फसल बर्बाद हो गयी. इसमें लगभग दो हजार क्विंटल गेहूं, 300-400 क्विंटल सरसों, 200 क्विंटल मसूर और 200 क्विंटल चना शामिल हैं. अन्य रबी फसल भी बर्बाद हुई. किसानों ने कहा कि कुल नुकसान लगभग 75 लाख रुपये के आसपास है.10 लाख के मछली बीज भी बर्बाद
लकड़मारा दह में असमय पानी निकालने से न केवल फसल का नुकसान हुआ बल्कि इस तालाब में गिराये गये 10 लाख रुपये मूल्य के मछली बीज भी बर्बाद हो गये. मेहरमा मत्स्य विभाग के अध्यक्ष दिलीप मंडल ने बताया कि मई माह में इस तालाब में 10 लाख 20 हजार रुपये का मछली बीज गिराया गया था. यदि समय पर मछली बीज निकाला जाता तो लगभग 50 लाख रुपये का व्यापार किया जा सकता था. किसानों का कहना है कि ठेकेदार की मनमानी के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. वे वरीय पदाधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि ठेकेदार और संबंधित विभाग के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाये और नुकसान का मुआवजा दिया जाये.
