नाला सफाई के बाद सड़क किनारे छोड़ी जा रही गाद, लोगों की बढ़ी परेशानी

दुर्गंध, कीचड़ और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा; नगर परिषद से तत्काल गाद उठाने की मांग

मानसून के आगमन को देखते हुए गोड्डा नगर परिषद क्षेत्र में नालों की सफाई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है. हालांकि, जलजमाव और बाढ़ की समस्या से निपटने के उद्देश्य से चलाये जा रहे इस अभियान की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. लोगों का आरोप है कि नालों से निकाली जा रही गाद को समय पर नहीं हटाया जा रहा है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर परिषद के सफाईकर्मी नालों से गाद निकालकर उसे सड़क किनारे ही छोड़ दे रहे हैं. कई दिनों तक गाद के खुले में पड़े रहने से आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही है, जिससे राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को परेशानी हो रही है. साथ ही संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गयी है. लोगों का कहना है कि स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब हल्की बारिश भी हो जाती है. सड़क किनारे जमा गाद वर्षा के पानी के साथ बहकर पुनः सड़कों और नालों में फैल जाती है. इससे सड़कें कीचड़मय हो जाती हैं और आवागमन बाधित होता है. विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों को फिसलन के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है, जबकि पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी असुविधा होती है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नियमानुसार नालों से निकाली गयी गाद को तत्काल ट्रैक्टर या ट्रॉली के माध्यम से निर्धारित डंपिंग स्थल तक पहुंचाया जाना चाहिए. यदि गाद गीली हो, तब भी उसे कुछ ही घंटों के भीतर हटा लेना आवश्यक होता है. इसके विपरीत नगर परिषद क्षेत्र में गाद कई दिनों तक सड़कों के किनारे पड़ी रहती है. शहर के प्रबुद्ध नागरिकों एवं व्यवसायियों ने आरोप लगाया है कि इस लापरवाही के कारण नाला सफाई अभियान का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है. उनका कहना है कि बस स्टैंड से असनबनी मस्जिद तक कई स्थानों पर नालों से निकाला गया कचरा और गाद पुनः बहकर नालों में ही पहुंच जा रहा है, जिससे सफाई कार्य की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से मांग की है कि नाला सफाई के तुरंत बाद गाद उठाने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, ताकि मानसून की बारिश शुरू होने से पहले शहरवासियों को दुर्गंध, कीचड़ और जलजमाव जैसी समस्याओं से राहत मिल सके.

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Author: SANJEET KUMAR

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