अभी पूरी तरह गर्मी शुरू नहीं हुई है, लेकिन डोय पंचायत के ग्रामीणों को पेयजल की गंभीर चिंता सताने लगी है. पंचायत के डोय, अलवा, हरिपुर, कमरगामा और महुआडीह गांवों में कुल आबादी करीब दस हजार है. यहां मुस्लिम, आदिवासी, केवट, हरिजन, तत्वा और कुर्मी जाति के लोग रहते हैं. पांच वर्ष पूर्व 15वें वित्त आयोग से लगभग 30 लाख रुपये की लागत से पंचायत में 12 सोलर जलमीनार स्थापित किये गये थे. इसके अलावा पीएचडी विभाग द्वारा दर्जनभर से अधिक चापानल भी लगाये गये थे. सोलर जलमीनार में फिल्टर लगा होने के कारण ग्रामीण स्वच्छ पेयजल का लाभ ले रहे थे. इससे पहले वे डब्बा वाला पानी खरीदकर पीते थे, जो अब मुफ्त में उपलब्ध हो गया था. लेकिन कुछ ही महीनों बाद सोलर जलमीनार या तो मोटर खराब होने या पानी का स्तर नीचे जाने के कारण निष्क्रिय हो गयी. इसके बाद ग्रामीणों को फिर से डब्बा वाला पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ा. कई बार मरम्मत के प्रयास के बावजूद जलमीनार अब भी खराब पड़ी है और केवल शोभा की वस्तु बनी हुई है. साथ ही, चापानल के जरिए लगाये गये अन्य सोलर जलमीनार भी बेकार पड़े हैं. गर्मियों से पहले पेयजल संकट को देखते हुए ग्रामीण सुमन कुमार, विजय मंडल, गंगाधर चौधरी, मो. इरशाद, मो. जफीर, नारायण कुमार, सूरज मंडल और रघु उरांव ने वरीय पदाधिकारियों से सोलर जलमीनार को जल्द ठीक कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के आने से पहले जल व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना आवश्यक है, नहीं तो पूरे पंचायत में पेयजल की समस्या गंभीर रूप ले सकती है.
मेहरमा के डोय पंचायत में पेयजल संकट, सोलर जलमीनार खराब होने से ग्रामीण परेशान
पांच हजार से अधिक आबादी वाले पंचायत में स्वच्छ जल की व्यवस्था चौपट
