पर्यावरण संरक्षण, पेड़ कटाव रोकने तथा आमजन के बीच पर्यावरण सुरक्षा का संदेश देने के उद्देश्य से सोमवार को बोआरीजोर वन क्षेत्र कार्यालय से जागरूकता रथ को रवाना किया गया. रथ को रेंजर संजय कुमार, मोंटे कार्लो कंपनी के महाप्रबंधक केके सिंह तथा हुर्रासी कंपनी के प्रबंधक केके गुप्ता ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. रेंजर संजय कुमार ने बताया कि पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा पांच दिवसीय पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इसकी शुरुआत एक जून को जागरूकता रथ के माध्यम से की गयी है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना है. उन्होंने कहा कि धरती को हरा-भरा बनाये रखने के लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है.
पर्यावरण संरक्षण को लेकर तय किये गये कार्यक्रम
वन विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 2 जून को वृक्षों को रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर वृक्ष रक्षा का संकल्प लिया जायेगा. तीन जून को क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा. चार जून को विद्यालयों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. 5 जून को प्लास्टिक बहिष्कार को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा. इसके अतिरिक्त हुर्रासी कोयला खनन क्षेत्र में कार्यरत मोंटे कार्लो कंपनी द्वारा कपड़े के थैलों का वितरण भी किया जाएगा, ताकि प्लास्टिक उपयोग को कम किया जा सके.ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता, पौधारोपण पर जोर
रेंजर संजय कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में लोग ग्लोबल वार्मिंग और असामान्य मौसम परिवर्तन की समस्या से जूझ रहे हैं. अनियंत्रित तापमान और अनियमित वर्षा से ग्रामीण जीवन प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा कि यदि वृक्षों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले समय में मानव जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है. उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम पांच पौधे लगाने की अपील की. वन विभाग ने बताया कि यह जागरूकता रथ विभिन्न गांवों में जाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करेगा और अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने का प्रयास करेगा. इस अवसर पर रतन कुमार झा, संजय हांसदा, राजीव कुमार, मुख्तार आलम सहित कई लोग उपस्थित थे.तालाब और नदी किनारे पौधारोपण में भारी अनियमितता, स्थानीय लोग नाराज
बसंतराय प्रखंड मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर वन विभाग द्वारा कराये गये पौधारोपण कार्य में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थल पर लगाये गये पौधों की संख्या बेहद कम है. सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2018 में लगभग 65 लाख 64 हजार 400 रुपये की लागत से तालाब परिसर में चार हजार पौधों का रोपण किया जाना था. योजना के तहत प्रति पौधा लगभग 1,641 रुपये खर्च करने का प्रावधान था। यह कार्य तत्कालीन जिला वन रक्षी पदाधिकारी की देखरेख में कराया गया था. ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर राशि का बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया गया. उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति में धरातल पर महज कुछ पौधे ही दिखाई दे रहे हैं, जबकि अधिकांश जगह खाली मैदान नजर आता है. उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
