भाईचारा, एकता और सहयोग का संदेश देता है सोहराय पर्व : डॉ धुनी सोरेन

इंग्लैंड से लौटे डॉक्टर ने ग्रामीणों के साथ पारंपरिक उत्सव में लिया भाग

संथाल आदिवासी समाज के प्रमुख और महत्वपूर्ण पर्व सोहराय के अवसर पर इंग्लैंड में रह रहे डॉक्टर धुनी सोरेन अपने गांव बोआरीजोर पहुंचे और ग्रामीणों एवं परिवारजनों के साथ धूमधाम से सोहराय पर्व मनाया. डॉक्टर धुनी और उनकी पत्नी भगवती हेंब्रम के आगमन पर गांव के पुरुष, महिलाएं और बच्चे गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए एकत्रित हुए. ग्रामीणों ने पारंपरिक आदिवासी नृत्य में भाग लेकर उत्सव को और जीवंत बनाया. डॉक्टर धुनी सोरेन ने कहा कि सोहराय पर्व हमें भाईचारा, एकता और आपसी सहयोग का संदेश देता है. उन्होंने बताया कि इंग्लैंड में रहकर भी उन्हें अपने गांव की याद आती रहती है. आदिवासी संस्कृति और परंपरा समाज को महान बनाती है, जिसे कभी नहीं भूलना चाहिए. उन्होंने सोहराय पर्व की तुलना हाथी से की और इसे विशाल और गौरवशाली पर्व बताया. डॉक्टर धुनी और उनकी पत्नी ने गांव के पूज्य स्थल मांझी स्थान में आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की. उन्होंने ग्रामीणों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें अपनी संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज को संभालकर रखना चाहिए. इस अवसर पर उन्होंने गरीब और असहाय ग्रामीणों में कंबल का वितरण भी किया. पर्व में प्राणिक नारायण बेसरा, रोजमेरी मरांडी, बेटा सोरेन, प्रेम मरांडी, ताला सोरेन, निर्मल सोरेन, लखन टुडू, जितेंद्र टुडू, बुधराम मुर्मू, सांझला सोरेन, सनी राम मुर्मू, दिलीप सोरेन, राजकुमार सोरेन, बाबूजी सोरेन, अनिल मरांडी सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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By Sanjeet kumar

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