मध्य प्रदेश से देश में घूम-घूमकर पुश्तैनी धंधा का दिखा रहे जौहर
भाती के सहारे मिनटों में चमका देते लोहे के हथियार व घरेलू सामान
जिस शहर में हो जाती है शाम उसी शहर में गिरा देते हैं डेरा
गोड्डा : शहर के विभिन्न मोहल्ले व चौक-चौराहों पर मध्य प्रदेश से आये लोगड़िया जनजाति के ऐसे परिवार विभिन्न स्थानों में टोली बनाकर डबिया, टांगी, तलवार, हसिया, खुरपी, कुदाल जैसे घरेलू उपयोग के सामान को मिनटों में बना देते हैं. स्थानीय सिविल सर्जन कार्यालय के समीप ऐसा ही एक परिवार कस्तूरी बाई का है. जो अपने पुत्र नत्थू लाल व रमेश लगड़िया व अन्य सदस्यों के साथ जो फुटपाथी कुटीर उद्योग को संभाले हुए हैं. कस्तूरी बाई की पोतोहू लूना बाई भी इस पेशे में परिवार के पुरुषों से हथौड़ा चलाने में कम नहीं है. कस्तूरी बाई बताया कि यह पुस्तैनी धंधा है. देश भर में घूम-घूम कर अपने कबिले के
लोगों के साथ इस रोजगार से अपना पेट पालती है. परिवार के मर्द बताते है कि अपने पूर्वजों से जो सिखा है मेहनत के बल पर अपना पेट पालते हैं. लूना बाई का कहना है कि आज तक उसके जाति के लोगों ने कभी की चाकरी नहीं की. भीख मांग कर खा लेना अच्छा है. किसी की चाकरी करना नहीं. बताया कि उसके बच्चे की जिंदगी तो खराब हो ही रही है करें भी तो क्या करें खानाबदोश है. न घर है, न जमीन.
कस्तूरीबाई के परिवार पर भी नोटबंदी का असर :कस्तूरी बाई बताती है कि नोटबंदी के बाद से उसके परिवार में भी असर हुआ है. कि अपना पेट काट कर किसी तरह 25 हजार रुपये जमा किया था. जिसे नहीं बदल पाने की स्थिति में 17 हजार में ही बेच दिया. बताया कि उस पैसे को रखकर क्या करते, बाहर में न तो कोई नोट लेने वाला था और न ही सहयोग करने वाला. ठंड के मौसम में एक ओर समस्या इस परिवार के सामने है कि चाह कर भी गरम कपड़े और कंबल नहीं खरीद पा रही है.
लोहे के सामान को भांति पर गरम कर चमकतो लोहंड़िया परिवार.
मारवाड़ी युवा मंच ने कस्तूरी बाई को दिया कंबल
कस्तूरी बाई दर्द-ए-दास्तान सुनकर मारवाड़ी युवा मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रीतम गाड़िया ने अपनी ओर से एक कंबल भेंट दी. श्री गाड़िया ने हालांकि रविवार को आश्वस्त किया है कि व्यवस्था हो जाने पर और भी कंबल उपलब्ध करा देंगे. कंबल पाकर कस्तूरी बाई और उसके परिजनों ने हाथ उठा कर दुआएं दी.
