प्रतिनिधि, पथरगामा प्रखंड के कोरका गांव में शनिवार से दो दिवसीय गोड्डा जिला संतमत सत्संग का 77वां वार्षिक अधिवेशन प्रारंभ हो गया है, जो आठ फरवरी को संपन्न होगा. संतमत सत्संग में सिद्धपीठ महर्षि मेंहीं आश्रम कुप्पाघाट के आचार्य महर्षि हरिनंदन जी महाराज, गुरुसेवी स्वामी भगीरथ जी महाराज एवं गुरुचरण स्वामी प्रमोद जी महाराज समेत अन्य साधु-महात्माओं व विद्वानों का आगमन हुआ है. इनके द्वारा संतमत सत्संग किया जा रहा है. संतमत सत्संग समिति कोरका घाट सह गोड्डा जिला संतमत समिति के ओमप्रकाश मंडल ने बताया कि प्रातः 6:00 बजे से अपराह्न 2:00 बजे तक भजन-कीर्तन, स्तुति-विनती, सदग्रंथ पाठ एवं प्रवचन का आयोजन किया जायेगा. बताया कि कोरका घाट गांव में महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के गुरुदेव परम संत बाबा देवी साह सन 1904 व 1912 ई में आये थे. वर्ष 1912 में वे कोरका में तीन दिनों तक अमृतमयी वाणी से भक्तों को तृप्त करते रहे. सन 1954 ई में कोरका में अखिल भारतीय संतमत सत्संग का 45वां वार्षिक अधिवेशन आयोजित हुआ था. वहीं 1986 व 2006 ई में जिला संतमत सत्संग का वार्षिक अधिवेशन भी कोरका में आयोजित किया गया था. परमाराध्य गुरुदेव महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज भी कई बार कोरका पधारे. अपने उपदेशों से भक्तों को अभिभूत किया. महर्षि संत देवी व महर्षि शाही स्वामी का भी कई बार कोरका में पदार्पण हुआ. बताया कि दीनदयाल बाबू की बैलगाड़ी पर भगली साह उन्हें कुप्पाघाट से कोरका लाया करते थे, जहां कई दिनों तक सत्संग हुआ करता था. संतमत के प्रचार-प्रसार में पुराने सत्संगी संतों की रामदास, गोपी गुरुजी तथा कोरका के प्रधान ब्रह्मलीन दीनदयाल रामदास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. दीनदयाल रामदास ने अपनी जमीन पर स्वयं की राशि से भव्य संतमत सत्संग मंदिर का निर्माण कराया था. वे जीवनकाल के अंतिम दिनों तक सत्संग मंदिर में ही निवास कर ध्यान व सत्संग किया करते थे. उनकी समाधि कोरका सत्संग मंदिर परिसर में ही बनायी गयी है, जहां उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित है. दीनदयाल रामदास के पौत्र कृष्ण कुमार रामदास, रामकुमार रामदास व श्यामल कुमार रामदास का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
कोरका में संतमत सत्संग का 77वां वार्षिक अधिवेशन शुरू
संतमत सत्संग में सिद्धपीठ महर्षि मेंहीं आश्रम कुप्पाघाट के आचार्य महर्षि हरिनंदन जी महाराज, गुरुसेवी स्वामी भगीरथ जी महाराज एवं गुरुचरण स्वामी प्रमोद जी महाराज समेत अन्य साधु-महात्माओं व विद्वानों का आगमन हुआ है.
