गोड्डा : बदलते समय के साथ रोजगार के क्षेत्र में भी कई बदलाव आयें हैं. उनमे से एक रास्ता फूलों व पौधों की खेती है. यानि नर्सरी के माध्यम से भी लोग अपनी जीवन में सुगंध बिखेर सकते हैं. एक समय था जब चाक चला कर विप्लव पंडित अपनी आजीविका चलाता था. लेकिन बदलते परिवेश में पूर्वजों के चाक का काम छोड़ कर विप्लव पंडित अब फूलों की खेती कर रहे हैं.
सदर प्रखंड के गोरसंडा गांव में श्री पंडित ने कुदाल व खुरपी पकड़ मेहनत से अपने जीवन को संवारने में जुटे हैं. छोटी सी नर्सरी बना कर श्री पंडित पूरे परिवार समेत दिनभर फूल-पत्ति उगाने में व्यस्त रहते हैं. विप्लव पंडित ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व परिवार का भरण-पोषण करने के खातिर वह परदेश कमाने के लिए कोलकाता गये थे. कोलकाता में एक नर्सरी में उन्हें रोजाना दिहाड़ी मजदूरी पर काम मिला था. फूल-पत्ति का काम करते-करते उन्होंने बागवानी का काम पूरी तरह से सीख लिया.
लौट कर घर गोरसंडा आये और स्वयं की छोटी सी नर्सरी बनायी. पुन: कोलकाता जाकर तरह-तरह के फूल फल वाले पौधे लाकर बागवानी शुरू कर दी. बताया कि फिलहाल उसके नर्सरी में चालीस तरह के फूल के पौधे व पंद्रह तरह के फल के पौधे की तैयारी कर रहे हैं. श्री पंडित ने बताया कि गोड्डा के अलावा दुमका से लेकर पीरपैंती बाराहाट बाजारों में फूल, फल के पौधे को बेच कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं.
